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सूर्य की हलचल का रौद्र रूप; भारत पर भी मंडरा रहा खतरा, ISRO ने भीषण रेडियो ब्लैकआउट की चेतावनी जारी की

सूर्य में लगातार आए 27 सौर तूफानों से मची हलचल ने नासा से लेकर इसरो तक की चिंता बढ़ा दी है। इन सोलर फ्लेयर्स के चलते ही इसरो ने भीषण ब्लैकआउट की चेतावनी जारी कर दी है।

   गत 1 फरवरी से सूर्य लगातार ताकतवर सोलर फ्लेयर्स छोड़ रहा है। इसरो से लेकर नासा ने इसे लेकर भारत सहित दुनिया भर में रेडियो ब्लैकआउट या पावरग्रिड फेल होने की संभावना की चेतावनी जारी की है। सोलर फ्लेयर्स सूर्य के अंदर होने वाले विस्फोटों की वजह से होते हैं और ये सोलर फ्लेयर्स चुंबकीय गुणों से भरे होते हैं। इन्हें सौर तूफान भी कहा जाता है।

क्या होता है सौर तूफान

वैज्ञानिकों का मानना है कि इन सौर तूफानों के कारण 5 फरवरी को धरती पर भू-चुंबकीय गतिविधि बढ़ सकती है और इसके कारण सामान्य इलाकों में भी नॉर्दर्न लाइट्स यानी 'ऑरोरा' दिखाई दे सकते हैं। सूर्य पर आने वाले सौर तूफान जब पृथ्वी के वातावरण में टकराते हैं तो हलचल पैदा करते हैं। इस तरह के सोलर फ्लेयर्स से विद्युत चुम्बकीय रेडिएशन की बहुत ज्यादा मात्रा निकलती है, जो लगभग तुरंत पृथ्वी तक पहुंच जाती है। इसकी वजह से भारत की इसरो सहित दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियों ने चेतावनी जारी की है।

इसरो ने जारी किया है अलर्ट

इसरो संभावित रेडियो ब्लैकआउट की स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है। बता दें कि तीव्र सौर तूफान, जब पृथ्वी की ओर बढ़ते हैं, तो उपग्रहों को नुकसान पहुंचाते हैं, टेलीविजन संकेतों को बाधित करते हैं और रडार तथा बिजली ग्रिड को प्रभावित करते हैं। नासा के स्पेस अलर्ट ने पुष्टि की है कि तेज फ्लेयर्स एक फरवरी को शुरू हुए थे। नासा ने भी अपने लेटेस्ट अलर्ट में कहा कि 4 फरवरी को सुबह 7.13 बजे (अमेरिकी समयानुसार) सूर्य से इतना तेज फ्लेयर छूटा, जो अपने चरम पर था।

 इसरो के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि 50 से अधिक कार्यरत भारतीय उपग्रहों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि सौर गतिविधि में वृद्धि से संचार, नेविगेशन और उपग्रह पेलोड में व्यवधान उत्पन्न होने का खतरा है। इसरो ने बताया है कि, "रेडियो ब्लैकआउट की प्रबल संभावना है। इसरो के सभी उपग्रहों की बहुत बारीकी से निगरानी की जा रही है। इससे संचार बाधित होने की किसी भी स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जाएगी।"
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