झारखंड: वास्तविक छात्र आंदोलन
JPSC-JSSC पेपर लीक विवाद: 11वें दिन भी उबाल पर छात्र आंदोलन, हेमंत सरकार पर बढ़ा दबाव, 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान;
Tropic Reporters, Digital desk, रांची/भोपाल, 4 अगस्त 2026:
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| झारखंड छात्र आंदोलन धीरे-धीरे बड़ा रूप ले रहा है |
झारखंड की राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में छात्रों का आंदोलन लगातार 11वें दिन भी जारी है।
जन्तर-मन्तर पर हुए कॉकरोच पार्टी के तथाकथित स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट के एकदम विपरीत, इस आंदोलन को हर तरह की राजनीति से दूर रखने का पूरा प्रयास आंदोलनरत छात्रों द्वारा किया जा रहा है। यहाँ तक कि वहां पहुंचे वामपंथियों को भी देशविरोधी नारेबाजी से रोक दिया गया तथा लाउड स्पीकर पर स्पष्ट संदेश भी दिया गया कि यहां किसी भी प्रकार के देश विरोधी नारों की कोई जगह नहीं है। झारखंड में जेएमएम और काँग्रेस की सरकार है और शिक्षा मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हैं। अतः इसमें भी कोई आश्चर्य नहीं है कि जन्तर-मन्तर पर तथाकथित छात्र आंदोलन में जमावड़ा लगाने वाले केंद्रीय विपक्षी दलों के किसी भी नेता ने अब तक इस वास्तविक विद्यार्थियों के आंदोलन को अपना समर्थन नहीं दिया है। कारण स्पष्ट है कि इस आंदोलन में छात्र इन दलों को अपनी राजनीति की रोटियां नहीं सेंकने देना चाहते। सम्भवतः इसीलिए इस आंदोलन में अब तक कोई जुनैद भी अपना लंगर लगाने के लिए नहीं पहुंचा है।
इतनी कठिनाइयों का सामना करने के बाद भी, यह आंदोलन अब राज्य के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में शामिल हो गया है। प्रदर्शनकारी छात्र 19 अप्रैल को आयोजित हुई 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक (JPSC PT) परीक्षा को रद्द करने, पूरे मामले की CBI जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का करेंगे घेराव
आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसके साथ ही छात्र संगठनों ने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव करने की घोषणा भी कर दी है।
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| आंदोलनरत छात्र एवं अगुआ देवेन्द्र नाथ महतो |
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| भूख हड़ताल पर देवेन्द्र नाथ महतो एवं आंदोलनरत छात्र |
राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंपी
प्रदर्शनकारी युवाओं का आरोप है कि राज्य में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया लगातार विवादों में रही है और योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। छात्रों का दावा है कि 14वीं JPSC पीटी परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। इसके अलावा परीक्षा संचालन का जिम्मा TDPL जैसी विवादित और कथित तौर पर ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को दिए जाने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह पैदा होता है।
लगातार बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंपी है। जांच एजेंसी ने रांची, हजारीबाग और धनबाद समेत 18 स्थानों पर छापेमारी कर OMR शीट, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। हालांकि छात्र इस कार्रवाई को पर्याप्त नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच केवल केंद्रीय एजेंसी CBI ही कर सकती है।
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| विद्यार्थियों ने आंदोलन को राजनैतिक दलों से दूर ही रखा है |
आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार पर संवादहीनता का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई दिनों से धरने पर बैठे छात्रों से न तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और न ही संबंधित मंत्रियों ने प्रभावी बातचीत की है। बारिश के दौरान धरनास्थल पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने को लेकर भी प्रशासन की आलोचना हो रही है। वास्तव में झारखंड सरकार एवं प्रशासन ने न सिर्फ आंदोलन के लिए टेंट लगाने से छात्रों को रोका, बल्कि खराब मौसम में आंदोलन स्थल की बिजली भी काट दी।
आंदोलन को मिल रहा भाजपा का समर्थन
राजनीति से दूर इस आंदोलन में शामिल छात्रों की माँगों को भाजपा का पूरा समर्थन प्राप्त हो रहा है। विपक्ष लगातार हेमंत सोरेन सरकार को घेर रहा है और संवेदनहीनता का आरोप लगा रहा है। राज्य में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता खत्म हो चुकी है। वहीं सरकार का कहना है कि पूरे मामले की CID जांच चल रही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सरकार ने परीक्षा रद्द करने या CBI जांच कराने की कोई घोषणा नहीं की है।
छात्रों का कहना है कि झारखंड गठन के बाद से अधिकांश बड़ी भर्ती परीक्षाएं विवादों में रही हैं और हर सरकार ने युवाओं को रोजगार देने के वादे किए, लेकिन निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में अब सबकी नजर अब 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव और सरकार की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।




