आलेख: एक तिरंगा, एक संकल्प

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एक तिरंगा, एक संकल्प: नशामुक्त मध्यप्रदेश, सशक्त भारत;
                                                      संदीप सिंह गहरवार
Tropic Reporters, Digital desk, भोपाल, 15 अगस्त 2026:
आज देश स्वतन्त्रता दिवस का 80वां पर्व मना रहा है
जादी केवल तिरंगा फहराने का पर्व नहीं, बल्कि हर उस बुराई से मुक्ति का संकल्प है जो राष्ट्र की आत्मा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को कमजोर कर रही है। 15 अगस्त हमारे लिए केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का दिन भी है। 15 अगस्त 1947 को भारत ने अंग्रेजी दासता से मुक्ति पाई थी। आज 79 वर्ष बाद हमारे सामने आजादी का एक नया अर्थ गढ़ने की चुनौती है। यह चुनौती है, नशे से मुक्ति की, भ्रष्टाचार से मुक्ति की, अपराध से मुक्ति की, बेरोजगारी से मुक्ति की, सामाजिक पतन से मुक्ति की और उन तमाम बुराइयों से मुक्ति की, जो धीरे-धीरे समाज की नींव को खोखला कर रही हैं। इस वर्ष 15 अगस्त पर हमारा सबसे महत्वपूर्ण संकल्प “नशामुक्त मध्यप्रदेश, नशामुक्त भारत” होना चाहिए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को नशे के दुष्चक्र से बाहर निकालने के लिए जिस दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ अभियान को गति दी है, उसमें समाज की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। पुलिस, नारकोटिक्स विभाग और विभिन्न सरकारी एजेंसियां नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध लगातार कार्रवाई कर रही हैं। उन सभी पुलिसकर्मियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को नमन, जो इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपने सामर्थ्य और संसाधनों को पूरी ताकत से लगा रहे हैं। लेकिन नशे के खिलाफ यह लड़ाई केवल सरकार की नहीं हो सकती। यह परिवार, समाज और हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।
           आज नशे का जाल हमारी युवा पीढ़ी तक तेजी से पहुंच रहा है। अवैध रूप से इस्तेमाल किए जा रहे कफ सिरप से लेकर अफीम, चरस, गांजा, शराब और एमडी जैसे मादक पदार्थों का कारोबार केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं है, बल्कि यह हमारे सामाजिक और पारिवारिक भविष्य के सामने खड़ा गंभीर संकट है। कहा जाता है, “नशा नाश की जड़ है।” नशा केवल एक व्यक्ति को बर्बाद नहीं करता, बल्कि उसके साथ पूरा परिवार प्रभावित होता है और कई बार एक पीढ़ी इसकी कीमत चुकाती है। नशे से जुड़े अपराधों में बढ़ोतरी इस खतरे को और गंभीर बनाती है। इसलिए सरकार के अभियान के साथ कदमताल करते हुए प्रत्येक परिवार को अपने बच्चों और परिजनों के प्रति सजग रहना होगा। हमें अपने घरों में ऐसा वातावरण बनाना होगा, जहां युवा तनाव, अकेलेपन या गलत संगत का सहारा नशे में नहीं, बल्कि परिवार, शिक्षा, खेल, रचनात्मकता और सकारात्मक जीवन मूल्यों में तलाशें।
सवाल यह नहीं कि नशे से लड़ाई कौन जीतेगा। सवाल यह है कि क्या हम सब मिलकर अपने बच्चों को नशे की गुलामी से आजादी दिला पाएंगे? इस सवाल का जवाब केवल हां या ना में नहीं, बल्कि हमारे सामूहिक प्रयासों में छिपा है।
आजादी का अर्थ केवल बाहरी बंधनों से मुक्ति नहीं:
  15 अगस्त को घर-घर तिरंगा लहराना, राष्ट्रध्वज को सलाम करना और देशभक्ति के गीत गाना हमारी राष्ट्रीय भावना की अभिव्यक्ति है। लेकिन आजादी की सार्थकता तभी सिद्ध होगी, जब हम अपने भीतर और अपने समाज में मौजूद उन बुराइयों के विरुद्ध भी खड़े होंगे, जो हमारे लोकतंत्र और सामाजिक व्यवस्था को कमजोर कर रही हैं। भ्रष्टाचार, अपराध, बेरोजगारी, महंगाई, व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताएं, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र की चुनौतियां तथा नैतिक मूल्यों में गिरावट, ये सभी ऐसे प्रश्न हैं, जिनका समाधान केवल सरकारों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
हमें यह भी स्वीकार करना होगा कि रोजगार आज देश के युवाओं के सामने बड़ी चुनौती है। युवाओं के हाथ में काम और आंखों में भविष्य का भरोसा होगा, तो वे राष्ट्र निर्माण में अपनी ऊर्जा लगाएंगे। इसलिए सरकारों और व्यवस्था की जिम्मेदारी है कि रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएं, कौशल विकास को बढ़ावा मिले और युवाओं को अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें।
आजादी के इस पर्व पर राजनीति और प्रशासन को भी आत्ममंथन करना होगा। सत्ता किसी व्यक्ति या दल की निजी उपलब्धि नहीं, बल्कि जनता द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी है। राजनीति का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना और सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि जनसेवा और राष्ट्र निर्माण होना चाहिए।लोकतंत्र में जनता को आकर्षक वादों और तात्कालिक लाभों से आगे बढ़कर दीर्घकालीन विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुशासन के सवालों पर सोचने की जरूरत है। इसी तरह जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक व्यवस्था से भी पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदार कार्यसंस्कृति की अपेक्षा स्वाभाविक है।
आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस भारत का सपना देखा था, वह केवल राजनीतिक रूप से स्वतंत्र भारत नहीं था। वह ऐसा भारत था, जहां नागरिक सम्मान के साथ जीवन जी सकें, युवाओं के पास अवसर हों, व्यवस्था में न्याय हो और समाज में नैतिकता तथा मानवीय संवेदनाएं जीवित रहें।
*आइए, इस 15 अगस्त नया संकल्प लें :*
इस बार स्वतंत्रता दिवस पर हम केवल तिरंगे को सलाम न करें, बल्कि उसके तीनों रंगों की भावना को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। हम संकल्प लें कि नशे का सेवन नहीं करेंगे, नशे के अवैध कारोबार को बढ़ावा नहीं देंगे और अपने आसपास किसी युवा को नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने का प्रयास करेंगे। हम संकल्प लें कि भ्रष्टाचार को सामान्य मानकर स्वीकार नहीं करेंगे। हम संकल्प लें कि अपराध और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाएंगे। हम संकल्प लें कि अपने बच्चों को संस्कार, शिक्षा और सकारात्मक वातावरण देंगे। हम संकल्प लें कि बेरोजगारी और निराशा से जूझ रहे युवाओं को अवसर और मार्गदर्शन देने में अपना योगदान देंगे। और सबसे बढ़कर, हम संकल्प लें कि देश की आजादी को केवल इतिहास की उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्तमान की जिम्मेदारी समझेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नशे के खिलाफ जंग में मध्यप्रदेश का प्रत्येक नागरिक भागीदार बने। सरकार प्रयास करे और समाज उसका सहयोगी बने, तभी यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले सकेगा।
महिषासुर की तरह हमारे समाज को भीतर से कमजोर करने वाली बुराइयों के विरुद्ध आज हमें भी सामूहिक शक्ति का परिचय देना होगा। जिस दिन परिवार, समाज, सरकार, प्रशासन और युवा एक साथ खड़े हो जाएंगे, उस दिन नशे के कारोबारियों और सामाजिक बुराइयों के लिए जगह बहुत छोटी पड़ जाएगी। इस 15 अगस्त तिरंगे को सलाम करते हुए एक संकल्प अपने दिल में भी उतारें कि नशे की गुलामी से युवा पीढ़ी को आजाद कराना है। बुराइयों से समाज को आजाद कराना है। भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ आवाज उठानी है और ऐसा मध्यप्रदेश, ऐसा भारत बनाना है, जिस पर आने वाली पीढ़ियां गर्व कर सकें। यही सच्ची आजादी है, यही स्वतंत्रता दिवस का सच्चा संकल्प है।
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