कर्नाटक पुलिस भर्ती परीक्षा विवाद पर मंत्री प्रियांक खडगे का शर्मनाक बयान

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पुलिस भर्ती घोटाले पर मंत्री प्रियांक खडगे का विवादित बयान, कर्नाटक पुलिस भर्ती परीक्षा विवाद पर सियासत गरमाई, खडग़े बोले ''25 दिन भूख हड़ताल करें, लाठीचार्ज हो, फिर इस्तीफे पर सोचूंगा'', टिप्पणी पर बवाल;

Tropic Reporters, Digital desk, कर्नाटक/भोपाल, 04 अगस्त 2026:

कर्नाटक पुलिस भर्ती परीक्षा विवाद पर मंत्री प्रियांक खडगे का शर्मनाक बयान

र्नाटक की पुलिस भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे का एक बयान राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। इस्तीफे की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए खड़गे ने कहा, "पहले छात्र 25 दिन भूख हड़ताल करें, फिर उन पर लाठीचार्ज हो, उसके बाद मैं इस्तीफा देने के बारे में सोचूंगा।" उनके इस बयान को विपक्ष ने छात्रों की भावनाओं का अपमान बताते हुए सरकार के अहंकार का प्रतीक करार दिया है।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राज्य में पुलिस भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।


क्या कहा मंत्री ने?

मीडिया से बातचीत के दौरान जब प्रियांक खड़गे से परीक्षा विवाद की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि पहले छात्र 25 दिन तक भूख हड़ताल करें, फिर उन पर लाठीचार्ज हो, उसके बाद ही वह इस्तीफे पर विचार करेंगे। उनके इस बयान को कई राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों ने असंवेदनशील बताया।


बयान के बाद क्या रही प्रतिक्रिया?

प्रियांक खड़गे की टिप्पणी सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि मंत्री ने छात्रों के दर्द और लोकतांत्रिक विरोध का मजाक उड़ाया है। विपक्ष का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं तो सरकार को जवाब देने के बजाय संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी यह बयान तेजी से वायरल हुआ। कई छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों ने मंत्री के बयान की आलोचना करते हुए इसे युवाओं के संघर्ष का अपमान बताया। विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस बयान को लेकर सरकार की आलोचना और जवाबदेही की मांग तेज हो गई।


पहले सुधार की बात कर चुके हैं खड़गे

दिलचस्प बात यह है कि कुछ सप्ताह पहले स्वयं प्रियांक खड़गे ने भर्ती आयोगों में लोगों का भरोसा बहाल करने के लिए व्यापक सुधारों की जरूरत बताई थी। उन्होंने कहा था कि भर्ती संस्थानों में विश्वास का संकट है और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बड़े सुधार जरूरी हैं। ऐसे में उनके हालिया बयान को लेकर विपक्ष ने उन पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया है।


राजनीतिक घमासान तेज

मंत्री के बयान के बाद कर्नाटक की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से इस बयान पर विस्तृत आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार परीक्षा विवाद के मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

इस बीच अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग को लेकर है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता विवादित बयान देने के बजाय भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवालों का जवाब देना और युवाओं का भरोसा बहाल करना होना चाहिए।

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