राष्ट्रीय मानव संग्रहालय: तिरंगा यात्रा

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“हर घर तिरंगा अभियान” के अंतर्गत मानव संग्रहालय से बोट क्लब तक निकली भव्य तिरंगा यात्रा;

Tropic Reporters, अपर्णा मिश्रा, भोपाल, 12 अगस्त 2026:

स्वतंत्रता दिवस के 80वें वर्ष के अवसर पर देशभर में चलाए जा रहे “हर घर तिरंगा अभियान” के अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल के तत्वावधान में 12 अगस्त 2026 को भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा प्रातः 11:30 बजे संग्रहालय के जनजातीय आवास परिसर स्थित “मणिपुर के कांगला द्वार” से प्रारंभ होकर “राजस्थान की पारंपरिक राजपूत छत्री” एवं “असम के कारापात द्वार” भिन्न भिन्न प्रदर्शनियों से होते हुए भोपाल के राजाभोज ताल स्थित बोट क्लब तक पहुंची।
राष्ट्रीय मानव संग्रहालय से बोट क्लब तक तिरंगा यात्रा

"हर घर तिरंगा अभियान" में तिरंगा यात्रा
यात्रा के आरम्भ में उपस्थित सभी संग्रहालय कर्मियों, विद्यार्थियों, एवं दर्शकों को संबोधित करते हुए,संग्रहालय के जनसंपर्क अधिकारी श्री हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास और उसके सम्मान से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय तिरंगा केवल तीन रंगों से बना राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष, राष्ट्रीय एकता, त्याग, बलिदान और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने तिरंगे को सम्मानपूर्वक फहराने तथा उसके गौरव और मर्यादा को बनाए रखने के संबंध में भी जानकारी दी और स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को नमन किया।



उन्होंने बताया 1906 में कलकत्ता में राष्ट्रीय ध्वज के प्रारंभिक स्वरूपों में से एक फहराया गया। पिंगली वेंकैया द्वारा प्रस्तावित ध्वज के स्वरूप ने आगे चलकर राष्ट्रीय ध्वज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1931 में तिरंगे के एक स्वरूप को व्यापक स्वीकृति मिली, जिसमें केसरिया, सफेद और हरे रंग के साथ चरखे का प्रयोग किया गया था। स्वतंत्र भारत के लिए संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज को स्वीकार किया। इसमें चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक के धर्मचक्र का प्रतीक 24 तीलियों वाला अशोक चक्र स्थापित किया गया। 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र भारत ने इसी तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में गौरव के साथ अपनाया।
तिरंगे का प्रत्येक रंग और अशोक चक्र भारत की महान सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय चेतना का संदेश देता है। केसरिया साहस और त्याग, सफेद सत्य एवं शांति तथा हरा समृद्धि और जीवन का प्रतीक माना जाता है, जबकि अशोक चक्र निरंतर गति, धर्म और प्रगति का संदेश देता है।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी राष्ट्रीय चेतना और स्वाधीनता के सपने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया।
तिरंगा भारत की एकता, अखंडता, गौरव, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। स्वतंत्रता के इस महापर्व पर “हर घर तिरंगा अभियान” के माध्यम से प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त करने और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को स्मरण करने का संदेश दिया जा रहा है।
तिरंगा यात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने राष्ट्रध्वज के सम्मान में देशभक्ति के नारे लगाए तथा तिरंगा गीतों का सामूहिक गायन किया। यात्रा का समापन बोट क्लब पर राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और स्वतंत्रता संग्राम के वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन के साथ हुआ।
इस अवसर पर  तिरंगा यात्रा के संयोजक हेमंत बहादुर सिंह परिहार, प्रशासनिक अधिकारी डॉ. पी. शंकर राव, डॉ. सोमा किरो, डॉ. एस.के. पांडे, डॉ. मनोज कुमार जैन, धीर सिंह, से.नि. कर्नल नितिन देशपांडे, डॉ. रविंद कुमार गुप्ता, डॉ. उमेश झारिया, श्री राजेश गौतम, श्रीमती गरिमा आनंद दुबे, श्रीमती रश्मि, श्रीमती नीलम श्रीवास्तव , श्रीमती आरती कुशवाह, डा शिखा टहंनगुरिया , संदीप शर्मा, निर्मल सिंह , श्रीमती शांति, मनोज झा, दीपक चौधरी, धरणीधर सेनापति, सुनील अलपुरिया,अतुल पांडे , भगवान बोर्डे,अभिषेक यादव सहित संग्रहालय की सभी इकाइयों के अधिकारी-कर्मचारी, पीजीडीएम के विद्यार्थी , सुरक्षा कर्मी एवं दर्शक उपस्थित रहे।
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