टीएमसी का विघटन पक्का
By Tropic Reporters — Monday, June 8, 2026
🎧 सुनें:
टीएमसी में बगावत की आँच बंगाल से नई दिल्ली तक पहुंची; इंडी गठबंधन की बैठक के समय ही बागी सांसदों की बैठक से बढ़ी सियासी हलचल
बागी सांसदों की बंगाल भाजपा प्रभारी के घर में रणनीतिक बैठक, इंडी गठबंधन के बैठक स्थल से मात्र 1 किमी की दूरी पर विघटित हुई टीएमसी;
Tropic Reporters, नई दिल्ली, 08 जून 2026:
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। सोमवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास पर टीएमसी के बागी सांसदों की एक अहम बैठक हुई, जिसने राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अलावा 21 असंतुष्ट टीएमसी सांसदों की मौजूदगी की खबर है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब टीएमसी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रहे सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और संगठन के भीतर बढ़ती अव्यवस्था को अपनी नाराजगी का प्रमुख कारण बताया है।
आश्चर्यजनक रूप से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर विद्रोही टीएमसी सांसदों की बैठक ठीक उसी समय हुई, जबकि ममता बनर्जी इंडी गठबंधन की बैठक में उपस्थित थीं। इतना ही नहीं, दोनों बैठक स्थलों की एक दूसरे से दूरी महज 1 किमी थी।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में हुई बैठक में टीएमसी के कई सांसदों ने भविष्य की रणनीति पर चर्चा की। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कुछ सांसद लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने की मांग भी कर चुके हैं।
टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष को पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों के पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाने की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में विधायकों के बाद अब बागी सांसदों की सक्रियता ने पार्टी के भीतर संभावित टूट की अटकलों को और मजबूत कर दिया है।
वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि असंतुष्ट सांसदों की संख्या बढ़ती है तो इसका असर संसद में टीएमसी और भाजपा की ताकत पर भी पड़ सकता है। भाजपा और एनडीए के साथ संभावित नजदीकियों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, हालांकि बागी नेताओं की ओर से अभी तक किसी औपचारिक गठबंधन या नई पार्टी के गठन की घोषणा नहीं की गई है।
फिलहाल सभी की निगाहें टीएमसी नेतृत्व की अगली रणनीति और बागी सांसदों के अगले कदम पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
📝 सारांश:
सारांश लोड हो रहा है...