बाल रंगमंच कार्यशाला
मानव संग्रहालय में 30 दिवसीय प्रोडक्शन ओरिएंटेड बाल रंगमंच कार्यशाला का समापन;
10 जून को होगा बाल नाटक "मोबाइल के जाल का जंजाल" का मंचन
Tropic Reporters, भोपाल, 08 जून 2026
इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 30 दिवसीय “प्रोडक्शन ओरिएंटेड चिल्ड्रन्स थिएटर वर्कशॉप” का समापन 10 जून 2026 को संग्रहालय परिसर में विशेष नाट्य प्रस्तुति के साथ होगा।
कार्यशाला के समापन अवसर पर बाल प्रतिभागियों द्वारा सामाजिक सरोकारों पर आधारित नाटक “मोबाइल के जाल का जंजाल” का मंचन सायं 6:00 बजे संग्रहालय के वीथि संकुल स्थित अंतरंग वातानुकूलित सभागार में किया जाएगा।
बच्चों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास, अनुशासन, सामूहिक सहभागिता तथा अभिव्यक्ति कौशल के विकास के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में बाल प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। एक माह तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बच्चों को रंगमंच की विविध विधाओं का व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
कार्यशाला के दौरान बच्चों को अभिनय, संवाद-अभिनय, शारीरिक अभिव्यक्ति, स्वराभिनय, मंचीय अनुशासन, लोक परंपराओं, संगीत, नृत्य तथा रंगमंचीय तकनीकों से भी परिचित कराया गया।
अनुभवी रंगकर्मियों एवं प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में बच्चों ने यह सीखा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, सामाजिक चेतना और संवेदनशीलता के निर्माण का एक प्रभावी मंच भी है।
समापन प्रस्तुति के रूप में मंचित होने वाला नाटक “मोबाइल के जाल का जंजाल” वर्तमान समय की एक महत्वपूर्ण सामाजिक समस्या को केंद्र में रखता है। यह नाटक बच्चों एवं अभिभावकों को मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करता है। नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि डिजिटल उपकरणों का संतुलित उपयोग आवश्यक है तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए उन्हें खेल, लोककथाओं, पुस्तकों, संगीत, नृत्य, कला एवं सामाजिक गतिविधियों से भी जोड़ना चाहिए।
कार्यक्रम के संबंध में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, भोपाल के निदेशक संजय श्रीवास्तव ने बताया कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय एवं इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का यह संयुक्त प्रयास अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायी है। ऐसी कार्यशालाएँ बच्चों के व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, अभिव्यक्ति कौशल तथा सामाजिक संवेदनशीलता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ भोपाल सहित देश के अन्य नगरों में भी नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए ताकि अधिक से अधिक बच्चों को रचनात्मक एवं सांस्कृतिक विकास के अवसर प्राप्त हो सकें।
संग्रहालय के जन संपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को अनेक प्रतिष्ठित रंगकर्मियों, कलाकारों एवं विशेषज्ञों से संवाद करने का भी अवसर मिला, जिससे बच्चों ने भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत करना, दैनिक जीवन की घटनाओं और अनुभवों की नाट्य रूपांतरण के माध्यम से अभिव्यक्ति तथा रंगमंच के माध्यम से आत्मविश्वास और संप्रेषण क्षमता को सुदृढ़ बनाने की कला एवं उनकी बारीकियां सीखीं। कार्यशाला का संयोजन श्री राजेन्द्र कुमार झारिया, सहायक कीपर द्वारा किया गया।
संग्रहालय के निदेशक डॉ अमिताभ पांडे ने बताया कि, 30 दिवसीय प्रोडक्शन ओरिएंटेड बाल रंग मंच कार्यशाला का संचालन प्रभावपूर्ण ढंग से किया गया, जिसमें बाल रंगमंच की संवेदनशीलता, रचनात्मकता एवं सामाजिक उपयोगिता पर विशेष प्रकाश डाला गया। संग्रहालय परिवार ने नागरिकों, अभिभावकों, कला प्रेमियों एवं विद्यार्थियों से इस विशेष नाट्य प्रस्तुति में उपस्थित होकर बाल कलाकारों का उत्साहवर्धन करने का आग्रह किया है।




