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CBSE में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: OSM विवाद के बीच चेयरमैन राहुल सिंह हटाए गए; डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पर उठे सवालों ने बढ़ाई मुश्किलें, केंद्र सरकार ने शुरू की उच्चस्तरीय जांच

Tropic Reporters, भोपाल:
देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में से एक सीबीएसई (CBSE) इन दिनों अपने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर विवादों में है। इसी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है तथा पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब छात्रों, अभिभावकों और विपक्षी दलों की ओर से मूल्यांकन प्रक्रिया और डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट आवंटन में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। 

क्या है पूरा OSM विवाद?
ओएसएम यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम वह डिजिटल व्यवस्था है जिसके जरिए बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ऑनलाइन किया जाता है। आरोप है कि इस सिस्टम से जुड़े ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) के आवंटन में नियमों में बदलाव किए गए और कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर शर्तों में ढील दी गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते हुए पूछा था कि आखिर टेंडर प्रक्रिया में बदलाव किसके कहने पर किए गए और किसे लाभ पहुंचाया गया। 
हालांकि सीबीएसई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत हुई है और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई। बोर्ड ने आरोपों को "भ्रामक और गलत" बताया था। 

किसका हुआ नुकसान?
इस विवाद का सबसे बड़ा असर छात्रों और अभिभावकों के विश्वास पर पड़ा है। कई छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए, जबकि परिणामों की पारदर्शिता पर भी चर्चा शुरू हो गई। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में भरोसा किसी भी शिक्षा बोर्ड की सबसे बड़ी पूंजी होती है और ऐसे विवाद उस भरोसे को कमजोर कर सकते हैं। 
इसके अलावा, सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में आ गई है। संसद की एक समिति भी इस मामले से जुड़े मुद्दों की समीक्षा कर रही है। 

केंद्र सरकार ने क्या कार्रवाई की?
विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने सीबीएसई चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया। साथ ही पूर्व केंद्रीय अधिकारी एस. राधा चौहान की अगुवाई में जांच शुरू करने का फैसला लिया गया है। जांच समिति यह देखेगी कि ओएसएम सेवाओं की खरीद और ठेका प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता या नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। 

नया चेयरमैन कौन बना?
सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब बोर्ड की कार्यप्रणाली और मूल्यांकन व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। सरकार का मानना है कि नया नेतृत्व बोर्ड की विश्वसनीयता बहाल करने और जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने में मदद करेगा। 

विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक टकराव
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंन्द्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षा मंत्रालय के अधीन हुई इस पूरी प्रक्रिया की जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं सरकार और सीबीएसई का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। 

फिलहाल क्या है ताजा अपडेट?
ताजा स्थिति यह है कि केंद्र सरकार ने मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है, सीबीएसई के शीर्ष अधिकारियों को बदल दिया गया है और नई प्रशासनिक टीम काम संभाल चुकी है। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ओएसएम सिस्टम के ठेका आवंटन और संचालन में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं। फिलहाल पूरा शिक्षा जगत इस रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है क्योंकि इसके निष्कर्ष भविष्य में सीबीएसई की डिजिटल परीक्षा व्यवस्था की दिशा तय कर सकते हैं।
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