TMC में टूट
By Tropic Reporters — Wednesday, June 3, 2026
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पश्चिम बंगाल: TMC में अंदरूनी कलह; क्या अभिषेक बनर्जी और IPAC हैं विवाद की वजह?
ममता की पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आया, बगावत और आरोपों से बढ़ी मुश्किलें
Tropic Reporters, भोपाल:
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही खींचतान चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी को झटका लगने के बाद कई नेता खुलकर नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। पार्टी के भीतर एक वर्ग का आरोप है कि संगठन में जमीनी कार्यकर्ताओं की बजाय रणनीतिक सलाहकार संस्था IPAC और अभिषेक बनर्जी के करीबी लोगों का प्रभाव बढ़ने से पुराने नेताओं की भूमिका कमजोर हुई है। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इन आरोपों को खारिज किया है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने टीएमसी में बढ़ती असहमति को सार्वजनिक कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया चुनावी प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर आत्ममंथन शुरू हुआ है। कई वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि चुनावी रणनीति में जमीनी संगठन की जगह डेटा आधारित प्रबंधन और सलाहकारों पर अधिक भरोसा किया गया। पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि पार्टी जनता की नब्ज समझने में विफल रही और IPAC की भूमिका को लेकर सवाल उठाए।
दूसरी ओर, अभिषेक बनर्जी लंबे समय से पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। विरोधियों और कुछ असंतुष्ट नेताओं का आरोप है कि संगठनात्मक फैसलों का अत्यधिक केंद्रीकरण हुआ है। हालांकि अभिषेक समर्थक नेताओं का कहना है कि उन्होंने पार्टी को आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया है।
हाल के दिनों में पार्टी से जुड़े कई नेताओं और विधायकों ने असहमति जताई है। दो विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित भी किया गया। इसके बाद कुछ बागी नेताओं ने दावा किया कि बड़ी संख्या में विधायक नेतृत्व से नाराज हैं। हालांकि टीएमसी ने ऐसे दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया राजनीतिक प्रचार बताया है।
एक और विवाद तब सामने आया जब कुछ विधायकों ने कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई। इस प्रकरण ने पार्टी की अंदरूनी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए और विपक्ष को सरकार व संगठन दोनों पर हमला करने का मौका मिल गया।
ममता बनर्जी ने हाल के सार्वजनिक कार्यक्रमों में पार्टी छोड़ने या विरोधी खेमे में जाने वाले नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए पार्टी के खिलाफ काम कर रहे हैं। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधी टीएमसी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में अभी क्या चल रहा है?
राज्य में चुनाव बाद का राजनीतिक माहौल अभी भी गर्म है। कई जिलों से राजनीतिक टकराव, विरोध प्रदर्शन और नेताओं पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। अभिषेक बनर्जी और अन्य टीएमसी नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं, जबकि पार्टी लगातार अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी होने का दावा कर रही है।
इस बीच भाजपा ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह टीएमसी के असंतुष्ट नेताओं को बड़े पैमाने पर शामिल करने के पक्ष में नहीं है। इससे राजनीतिक समीकरण और दिलचस्प हो गए हैं।
ताजा घटनाक्रम में पार्टी के भीतर बगावत की चर्चाएं तेज हैं, लेकिन अभी तक टीएमसी में किसी बड़े आधिकारिक विभाजन की पुष्टि नहीं हुई है। बागी नेताओं के दावे, विधायकों की शिकायतें और निष्कासन की कार्रवाई ने पार्टी नेतृत्व पर दबाव जरूर बढ़ाया है। फिलहाल ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों संगठन को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि यह असंतोष केवल अस्थायी नाराजगी है या फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत।
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