मानव संग्रहालय में “नृत्य साधना”

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मानव संग्रहालय में “नृत्य साधना” के माध्यम से जीवंत होगी कुचिपुड़ी की समृद्ध परंपरा

विशेष नृत्य प्रस्तुति के साथ 15 दिवसीय प्रोडक्शन ओरिएंटेड समर वर्कशॉप का समापन

Tropic Reporters, भोपाल, 14 जून 2026:

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय द्वारा भारतीय शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक चेतना के विकास के उद्देश्य से आयोजित 15 दिवसीय "प्रोडक्शन ओरिएंटेड समर वर्कशॉप ऑन कुचिपुड़ी डांस" का समापन 14 जून 2026 को एक विशेष मंचीय प्रस्तुति “नृत्य साधना” के साथ किया जाएगा। कार्यक्रम सायं 5:00 बजे संग्रहालय के सभागार, श्यामला हिल्स, भोपाल में आयोजित होगा।















"नृत्य साधना” केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि प्रतिभागियों की 15 दिनों की साधना, अनुशासन, समर्पण और कलात्मक विकास का सृजनात्मक प्रतिफल है। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को कुचिपुड़ी नृत्य की मूलभूत तकनीकों, शारीरिक मुद्राओं, ताल-लय, अभिनय, भावाभिव्यक्ति तथा मंचीय प्रस्तुति के विविध आयामों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। समापन समारोह में प्रतिभागी इन सभी तत्वों का समन्वित प्रदर्शन करते हुए दर्शकों के समक्ष अपनी कलात्मक यात्रा को साझा करेंगे।

कुचिपुड़ी भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है, जिसकी उत्पत्ति आंध्र प्रदेश में हुई। यह नृत्य शैली अपनी नाटकीयता, सौंदर्यपूर्ण गतियों, अभिव्यंजक अभिनय और आध्यात्मिक संवेदनाओं के लिए विश्वभर में प्रतिष्ठित है। “नृत्य साधना” के माध्यम से दर्शकों को इस समृद्ध परंपरा के विभिन्न पक्षों का अनुभव प्राप्त होगा तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहनता और विविधता से परिचित होने का अवसर मिलेगा।

संग्रहालय के निदेशक प्रो. अमिताभ पांडे ने बताया कि, कार्यशाला का उद्देश्य केवल नृत्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रतिभागियों में भारतीय शास्त्रीय कलाओं के प्रति समझ, संवेदनशीलता और सम्मान विकसित करना भी रहा है। प्रशिक्षण अवधि के दौरान विद्यार्थियों को कला के माध्यम से आत्म-अनुशासन, एकाग्रता, आत्मविश्वास और सामूहिक कार्य की भावना को भी आत्मसात करने का अवसर प्राप्त हुआ।

समापन प्रस्तुति में प्रतिभागियों द्वारा समूह एवं एकल नृत्य रचनाओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जिनमें कुचिपुड़ी शैली की विशिष्ट गतियाँ, भाव-प्रदर्शन, नाट्य तत्व और पारंपरिक सौंदर्य का समावेश होगा। यह आयोजन दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की जीवंत परंपरा का साक्षात्कार कराएगा तथा युवा कलाकारों की प्रतिभा और समर्पण को मंच प्रदान करेगा। 

संग्रहालय के जनसंपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय लंबे समय से देश की विविध लोक, जनजातीय एवं शास्त्रीय सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और प्रसार के लिए कार्यरत है। इसी श्रृंखला में आयोजित यह कार्यशाला और उसकी समापन प्रस्तुति भारतीय कला-संस्कृति के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

यह कार्यशाला संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता, गुरु वनश्री राव द्वारा परिकल्पित एवं नृत्यबद्ध (कोरियोग्राफ) की जा रही है, जिसमें उनके विशेषज्ञ मार्गदर्शन में प्रतिभागी गत पंद्रह दिनों से गहन प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य एक प्रोडक्शन-आधारित प्रस्तुति के साथ कार्यशाला का समापन करना था, जिससे इसके द्वारा प्रतिभागियों को नृत्य-रचना, मंच-शिल्प तथा प्रस्तुति कला का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।




कार्यशाला का समन्वयन सुश्री आयशा गराबडू, संग्रहालय सहायक, द्वारा तथा सह-समन्वयन सुश्री सुकन्या गुहा नियोगी, संग्रहालय सहायक द्वारा किया जा रहा है।
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