विश्व योग दिवस

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मानसिक शांति से लेकर स्वस्थ वृद्धावस्था तक योग बन सकता है बेहतर जीवन का आधार;

हर उम्र में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाने का है प्रभावी माध्यम

Tropic Reporters, अंज ठाकुर, भोपाल, 21 जून 2026:

ज की तेज रफ्तार और व्यस्त जीवनशैली में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। चिंता (एंग्जायटी), तनाव, अनियमित दिनचर्या और पर्याप्त विश्राम की कमी का असर अब केवल मन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे शरीर को प्रभावित करने लगा है। योग विशेषज्ञ रेणु आडलखा और डॉ. पूजा शुक्ला के अनुसार योग ऐसी जीवनशैली पद्धति है, जो मानसिक शांति के साथ स्वस्थ वृद्धावस्था का भी आधार बन सकती है।

मन ही नहीं, शरीर पर भी पड़ता है एंग्जायटी का असर

योग एक्सपर्ट रेनू अदलखा के अनुसार लगातार चिंता और तनाव की स्थिति में शरीर में तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। इसका प्रभाव हृदय गति, रक्तचाप और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली पर दिखाई दे सकता है।

रेणु अडलखा, योग विशेषज्ञ
लंबे समय तक तनाव रहने पर सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में जकड़न, पाचन संबंधी परेशानियां और नींद की समस्या सामने आ सकती है। इसके अलावा चिड़चिड़ापन, बेचैनी, एकाग्रता में कमी और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

योग से मिल सकती है तनाव और चिंता से राहत

योग शरीर, मन और श्वास के बीच संतुलन स्थापित करने की एक प्रभावी पद्धति मानी जाती है। नियमित योगाभ्यास मानसिक तनाव को कम करने और मन को शांत रखने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि योग और प्राणायाम तनाव हार्मोन को नियंत्रित करने और शरीर को विश्राम की अवस्था में लाने में सहायक हो सकते हैं।

विशेष योगासन होते हैं लाभकारी

तनाव और चिंता को कम करने के लिए कुछ सरल योगासन उपयोगी बताए गए हैं। बालासन मानसिक और शारीरिक विश्राम प्रदान करता है। मार्जरी-व्याघ्रासन शरीर की लचक बढ़ाने के साथ तनाव कम करने में सहायक माना जाता है। पश्चिमोत्तानासन तंत्रिका तंत्र को शांत करता है, जबकि विपरीतकरणी आसन मानसिक थकान को कम करने में मदद करता है। शवासन सम्पूर्ण शरीर को विश्राम देकर मन को शांति प्रदान करता है।

प्राणायाम से बढ़ सकती है मानसिक स्थिरता

अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम को मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। प्रतिदिन 5 से 10 मिनट तक इनका अभ्यास मन को शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और नींद की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकता है।

‘योग फॉर एजिंग’ थीम दे रही स्वस्थ जीवन का संदेश

वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “योग फॉर एजिंग” यह संदेश देती है कि योग किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं है। बढ़ती उम्र में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, जोड़ों का दर्द, तनाव और अकेलेपन जैसी चुनौतियों के बीच योग व्यक्ति को सक्रिय, आत्मनिर्भर और सकारात्मक बनाए रखने का माध्यम बन सकता है।

स्वस्थ वृद्धावस्था की तैयारी बचपन से जरूरी

डॉ. पूजा शुक्ला का मानना है कि स्वस्थ वृद्धावस्था की तैयारी केवल उम्र बढ़ने पर नहीं, बल्कि बचपन से शुरू होनी चाहिए।

डॉ. पूजा शुक्ला, योग विशेषज्ञ
यदि योग को शुरुआती उम्र से दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से बचाव संभव हो सकता है। योग केवल उपचार नहीं, बल्कि रोगों की रोकथाम का भी प्रभावी तरीका है।

वास्तव में योग जीवनशैली सुधारने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है, लेकिन यदि चिंता, बेचैनी, घबराहट, लगातार नींद की समस्या या उदासी लंबे समय तक बनी रहे और दैनिक जीवन को प्रभावित करे, तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है। नियमित योग, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और सकारात्मक दिनचर्या बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
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