यूथ स्किल डे: सीएम डॉ. यादव का संदेश
यूथ स्किल डे; एआई का दौर: अब सिर्फ डिग्री नहीं, नई स्किल ही दिलाएगी नौकरी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व युवा कौशल दिवस की शुभकामनाएं दीं;
समय रहते नई तकनीक नहीं सीखी तो पीछे छूटेंगे युवा - विशेषज्ञ, हर क्षेत्र में एआई जानने वालों की मांग;
Tropic Reporters, Digital desk, भोपाल, 15 जुलाई 2026:
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| विश्व युवा कौशल दिवस |
वर्तमान समय में यदि आप सिर्फ डिग्री के भरोसे अच्छी नौकरी का सपना देख रहे हैं, तो अब अपनी सोच बदलने का समय आ गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने नौकरी का पूरा स्वरूप बदल दिया है। अब कंपनियां ऐसे युवाओं की तलाश में हैं, जिन्हें अपने विषय के साथ-साथ एआई टूल्स और नई तकनीकों का भी अच्छा ज्ञान हो। यही वजह है कि आईटी ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, मीडिया, मार्केटिंग, प्रबंधन और इंजीनियरिंग जैसे लगभग हर क्षेत्र में एआई स्किल वाले युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। एआई के वर्तमान एवं युवाओं के भविष्य के संदर्भ में उनके मार्गदर्शन में उपयोगी कई विशेषज्ञों के द्वारा अपने विचार साझा किए गए।
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| विश्व युवा कौशल दिवस पर सीएम डॉ. यादव का शुभकामना संदेश |
करियर काउंसलर अभिषेक खरे का कहना है कि आज के समय में सबसे जरूरी स्किल 'एआई लिटरेसी' है, यानी एआई को समझने और उसे अपने काम में सही तरीके से इस्तेमाल करने की क्षमता। उनके अनुसार युवाओं को चैटजीपीटी, जेमिनी, क्लाड और कोपायलट जैसे एआई टूल्स के साथ पाइथन प्रोग्रामिंग, डाटा एनालिटिक्स, एक्सेल, एसक्यूएल, पावर बीआई, मशीन लर्निंग की बुनियादी जानकारी, क्लाउड कंप्यूटिंग, बेहतर संवाद कौशल और समस्या समाधान जैसी स्किल पर भी काम करना चाहिए। उनका कहना है कि आने वाले समय में केवल डिग्री नहीं, बल्कि सीखने की आदत, अच्छे प्रोजेक्ट और व्यावहारिक अनुभव ही युवाओं को आगे ले जाएंगे।
एआई विशेषज्ञ राहुल चतुर्वेदी बताते हैं कि एआई नौकरियां खत्म नहीं कर रहा, बल्कि काम करने का तरीका बदल रहा है। दोहराए जाने वाले और गणना वाले काम मशीनें करेंगी, जबकि इंसानों की जरूरत उन क्षेत्रों में रहेगी, जहां रचनात्मक सोच, निर्णय लेने की क्षमता और साथ ही मानवीय संवेदनाओं की आवश्यकता होगी। उनके अनुसार आने वाले पांच वर्षों में एआई इंजीनियर, जेनरेटिव एआई डेवलपर, डाटा वैज्ञानिक, मशीन लर्निंग इंजीनियर, प्राम्प्ट इंजीनियर, एआई कंटेंट विशेषज्ञ, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, एआई आटोमेशन विशेषज्ञ और बिजनेस इंटेलिजेंस विशेषज्ञ जैसी प्रोफाइल की मांग सबसे ज्यादा बढ़ेगी।
कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ डा. विजय भास्कर सैमवर का कहना है कि भविष्य की तकनीकों में डिजिटल ट्विन, वर्चुअल रियलिटी, डाटा एनालिटिक्स और डाटा जनरेशन जैसे क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इनसे जुड़े कोर्स छह महीने से दो वर्ष के बीच पूरे किए जा सकते हैं। उनका कहना है कि छात्र जितनी जल्दी इन तकनीकों को सीखना शुरू करेंगे, उनके लिए रोजगार के अवसर उतने ही अधिक होंगे।
भोपाल में सीख सकते हैं एआई और नई तकनीक
भोपाल में मैनिट, आईआईएसईआर और निफ्ट जैसे संस्थानों के अलावा कई निजी संस्थानों में एआई, डाटा साइंस, पाइथन, क्लाउड कंप्यूटिंग और डाटा एनालिटिक्स से जुड़े प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। कई संस्थान इंडस्ट्री प्रोजेक्ट और प्लेसमेंट सहायता भी उपलब्ध करा रहे हैं।
सिर्फ सर्टिफिकेट नहीं, कौशल भी जरूरी
विशेषज्ञों की सलाह है कि छात्र केवल प्रमाणपत्र लेने तक सीमित न रहें। छोटे-छोटे प्रोजेक्ट बनाएं, इंटर्नशिप करें, एआई टूल्स का रोज अभ्यास करें और अपनी संवाद क्षमता बेहतर बनाएं। एआई के इस दौर में वही युवा सबसे आगे रहेगा, जो सीखना नहीं छोड़ेगा, नई तकनीक अपनाएगा और बदलते समय के साथ खुद को लगातार अपडेट रखेगा।

