हैदराबाद: काव्यधारा साहित्यिक संगोष्ठी एवं काव्य पाठ का आयोजन

🎧 सुनें:

काव्यधारा की साहित्यिक संगोष्ठी एवं काव्य पाठ का भव्य आयोजन संपन्न, हैदराबाद की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरा पर हुआ समकालीन साहित्य के विविध आयामों पर सार्थक विमर्श;

Tropic Reporters, संदीप सिंह, हैदराबाद/भोपाल, 30 जुलाई 2026:

 हैदराबाद: 'काव्यधारा' द्वारा साहित्यिक संगोष्ठी एवं काव्य पाठ का आयोजन

साहित्य, संस्कृति और संवेदनाओं के समागम का अनुपम दृश्य उस समय देखने को मिला, जब हैदराबाद की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरा पर 'काव्यधारा' संस्था के तत्वावधान में भव्य साहित्यिक संगोष्ठी एवं काव्य पाठ का सफल आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य समकालीन साहित्य के विविध आयामों पर सार्थक विमर्श करना तथा देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों को एक साझा मंच प्रदान करना था। आयोजन संस्था की मार्गदर्शक आदरणीय सुनीता जी के स्नेहिल नेतृत्व एवं कुशल संयोजन में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ परंपरानुसार माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। सुप्रसिद्ध कवयित्री नेमा रवि जी ने अपने मधुर एवं सुरमय स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर पूरे सभागार को आध्यात्मिक एवं सकारात्मक ऊर्जा से आलोकित कर दिया।

साहित्यिक गोष्ठी दो सत्रों में आयोजित की गई। प्रथम सत्र का सफल संचालन वर्षा शर्मा एवं गीता अग्रवाल ने किया, जबकि द्वितीय सत्र का संचालन संस्था की महासचिव डॉ. प्रतिभा गर्ग तथा रचना चतुर्वेदी ने अत्यंत प्रभावी एवं गरिमापूर्ण ढंग से किया।

गोष्ठी में काव्य के शास्त्रीय एवं व्यावहारिक पक्षों पर गंभीर और सारगर्भित चर्चा हुई। विशिष्ट अतिथि आदरणीय विज्ञान व्रत जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि काव्य की भाषा सरल, सहज और आत्मीय होनी चाहिए। लेखक जिस भाषा में स्वयं को स्वाभाविक अनुभव करता है, उसी भाषा में किया गया लेखन सीधे पाठकों के हृदय तक पहुँचता है।

अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए ऋषभदेव शर्मा ने काव्य-शिल्प, भाषा-सौंदर्य और अभिव्यक्ति की सूक्ष्मताओं पर अत्यंत प्रेरक विचार व्यक्त किए। उनका वक्तव्य नवोदित एवं वरिष्ठ दोनों वर्ग के रचनाकारों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक रहा। कार्यक्रम में परम विद्वान सत्यप्रसन्न सर की गरिमामयी उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उनके वैचारिक मार्गदर्शन ने उपस्थित साहित्यकारों एवं श्रोताओं को नई दृष्टि प्रदान की। वहीं वरिष्ठ विदुषी विनीता की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान की। उनके मार्मिक काव्यपाठ ने सभागार को भावनाओं से भर दिया। साहित्य के प्रति उनका समर्पण और साधना उपस्थित सभी रचनाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।

काव्यपाठ सत्र में दोहा, गीत, ग़ज़ल, नवगीत एवं छंदमुक्त कविताओं का सुंदर संगम देखने को मिला। विज्ञान व्रत ने अपने जीवन-दर्शन से ओतप्रोत मर्मस्पर्शी दोहों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। डॉ. प्रतिभा गर्ग ने तरन्नुम में अपनी ग़ज़लों का प्रभावशाली पाठ किया, जबकि गीता अग्रवाल ने मधुर स्वर में भावपूर्ण गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया। वर्षा शर्मा ने अपनी विशिष्ट शैली में ग़ज़ल प्रस्तुत कर खूब सराहना प्राप्त की। ऋता शुक्ला की संवेदनशील रचना ने सभी को भावुक कर दिया, वहीं रचना चतुर्वेदी ने माता-पिता के निस्वार्थ प्रेम पर आधारित अपनी कविता के माध्यम से गहन भावनात्मक वातावरण निर्मित किया।

इस अवसर पर पाँच महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। इनमें 'खुशबू-ए-सुख़न' (ग़ज़ल-नज़्म संग्रह), 'मानसी' (गीत-नवगीत संग्रह), 'उड़ जाने दो' (ताजम्मुल फ़ातिमा का ग़ज़ल संग्रह), 'सूर्य निकलता रोज़ाना' (मनोरमा शर्मा) तथा 'आस-पास परिहास' (बैजनाथ सुनहरे का व्यंग्य-हास्य संग्रह) शामिल हैं। पुस्तक विमोचन समारोह ने आयोजन को विशेष साहित्यिक गरिमा प्रदान की।

कार्यक्रम के उत्तरार्ध में के.पी. अग्रवाल, गीता अग्रवाल, राजीव, ताजम्मुल फ़ातिमा, विनोद गिरी, डॉ. प्रतिभा गर्ग, ऋता शुक्ला, वर्षा शर्मा, आरजू महक, प्रह्लाद जोशी, मनोरमा शर्मा, बैजनाथ सुनहरे सहित अनेक वरिष्ठ एवं नवोदित रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया। विविध साहित्यिक विधाओं की प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को समृद्ध, जीवंत और यादगार बना दिया।

समापन अवसर पर संस्था की मुख्य आयोजक सुनीता ने सभी विशिष्ट अतिथियों, साहित्यकारों, पुस्तककारों एवं उपस्थित श्रोताओं का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से हिंदी भाषा और साहित्य की सतत सेवा का संकल्प दोहराया।

📝 सारांश:
सारांश लोड हो रहा है...
🔗 संबंधित लिंक: