मप्र विधानसभा का मॉनसून सत्र: हंगामे के साथ आरम्भ:

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मप्र विधानसभा के मानसून सत्र में पहले दिन UCC पर सियासी संग्राम, किसानों के मुद्दे और OBC आंदोलन से गरमाई विधानसभा;

समान नागरिक संहिता विधेयक पेश होने पर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने, खाद संकट, उज्जैन जमीन विवाद और आरक्षण की मांग ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान

Tropic Reporters, Digital desk, भोपाल, 20 जुलाई 2026:

ध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन पूरी तरह राजनीतिक टकराव और जनहित के मुद्दों के नाम रहा। सदन के भीतर समान नागरिक आचार संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। वहीं किसानों को खाद-बीज की उपलब्धता, कम बारिश, उज्जैन जमीन खरीदी प्रकरण और फसल बीमा जैसे विषयों पर भी सरकार को विपक्ष के सवालों का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर विधानसभा परिसर के बाहर 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई ने दिनभर का माहौल और अधिक गर्मा दिया। लगातार हंगामे और नोकझोंक के बीच कार्यवाही अंततः मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

UCC विधेयक पेश होते ही कांग्रेस ने उठाए सवाल
सरकार ने सदन में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) विधेयक-2026 पेश किया, लेकिन इसके साथ ही कांग्रेस ने प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आरोप लगाया कि विधेयक को पहले सदन के पटल पर रखा गया और बाद में अनुपूरक कार्यसूची में शामिल किया गया। उन्होंने इसे "चोरी-छिपे लाया गया विधेयक" बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस पर संशोधन प्रस्ताव भी लाएगी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई विपक्षी विधायकों ने भी एक साथ कई महत्वपूर्ण विधेयक सूचीबद्ध करने पर सवाल खड़े किए।

भाजपा का पलटवार, महिला अधिकारों का हवाला
विपक्ष के आरोपों पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के बाद सभी विधेयक नियमों के अनुसार सदन में रखे गए हैं और सदस्यों को उन्हें पढ़ने का पर्याप्त समय मिलेगा। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस चाहे जितना विरोध करे, यूसीसी लागू होने से नहीं रुकेगा। उनके अनुसार यह कानून महिलाओं को समान अधिकार देगा और बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर प्रभावी रोक लगाने का माध्यम बनेगा। वहीं कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि प्रदेश को समान नागरिक संहिता से अधिक समान शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है, जिससे सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा मिल सके।

खाद संकट पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने
दोपहर बाद नियम-139 के तहत किसानों को खाद-बीज की उपलब्धता और कम बारिश की स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार हर वर्ष पर्याप्त स्टॉक का दावा करती है, लेकिन किसान आज भी खाद के लिए लंबी कतारों में खड़ा रहने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद के बजाय केवल ओटीपी मिल रहा है। सिंघार ने पंचायत स्तर पर खाद वितरण की व्यवस्था और सरकार-विपक्ष की संयुक्त समिति बनाकर जमीनी हालात का निरीक्षण करने का सुझाव भी दिया।
पूर्व कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा कि वास्तविक समस्या खाद की कमी नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था की खामियां हैं। उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों को पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने फसल बीमा कंपनियों पर किसानों के हितों की अनदेखी कर लाभ कमाने का आरोप लगाया, जबकि विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने कहा कि किसान अपनी उपज का मूल्य तक स्वयं तय नहीं कर पाता।
खाद पर्याप्त, कालाबाजारी पर कार्रवाई जारी-सरकार
कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदेश में खाद का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में कमी की सूचना मिलेगी तो सरकार तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने जानकारी दी कि प्रदेश में वर्तमान में 27.10 लाख मीट्रिक टन खाद का स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि जहां भी कालाबाजारी या अनियमितता मिली है, वहां लाइसेंस निरस्त करने के साथ एफआईआर दर्ज करने जैसी कार्रवाई की गई है। सारंग ने यह भी कहा कि 20 जुलाई तक प्रदेश में सामान्य से 16 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज हुई है, लेकिन फिलहाल सूखे जैसी स्थिति नहीं बनी है और सरकार लगातार हालात पर नजर रखे हुए है।

उज्जैन जमीन प्रकरण पर भी हुआ हंगामा
सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उज्जैन में जमीन खरीदी के मामले पर स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से तत्काल चर्चा कराने की मांग उठाई। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार करने का आग्रह किया। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई और बढ़ते हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।

विधानसभा के बाहर OBC आरक्षण को लेकर प्रदर्शन
सदन के बाहर भी राजनीतिक माहौल गर्म रहा। 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने तथा 13 प्रतिशत होल्ड पदों को मुक्त करने की मांग को लेकर ओबीसी महासभा ने विधानसभा घेराव का प्रयास किया। रंगमहल चौराहे पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और बाद में उन्हें हिरासत में लेकर बसों के माध्यम से अन्य स्थानों पर भेज दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे पिछले आठ वर्षों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

सत्र से पहले कांग्रेस का प्रतीकात्मक विरोध
मानसून सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने गांधी प्रतिमा के सामने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों को खाद-बीज नहीं मिलने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), बेरोजगारी और कृषि संकट जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा गया।
कुल मिलाकर मानसून सत्र का पहला दिन स्पष्ट संकेत दे गया कि आगामी दिनों में यूसीसी, किसानों के मुद्दे, आरक्षण और प्रदेश के अन्य राजनीतिक विषयों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिलेगी।
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