ट्रेनों की बढ़ती संख्या, लोको पायलटों पर बढ़ा दबाव:
ट्रेनों की संख्या में लगातार इजाफा, लेकिन भर्ती की रफ्तार सुस्त, लोको पायलटों का पर बढ़ रहा दबाव;
भोपाल मंडल में प्रति सप्ताह 250 से अधिक ओवर-ऑवर ड्यूटी के मामले, फ्री क्रू नहीं मिलने से मालगाड़ियों का संचालन हो रहा प्रभावित
Tropic Reporters, अंज ठाकुर, भोपाल, 24 जुलाई 2026:
भारतीय रेलवे के विकास के सतत् प्रयासों के बाद भोपाल मंडल में गुड्स और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यात्रियों की मांग पर स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं और मालगाड़ियां रेलवे की सबसे बड़ी कमाई का आधार बनी हुई हैं, लेकिन ड्राइवर (लोको पायलट) और गार्ड (ट्रेन मैनेजर) की भर्ती उसी गति से नहीं हो रही। नतीजा यह है कि मौजूदा लोको पायलट 9 से 14 घंटे तक ड्यूटी करने को मजबूर हैं। जिससे कभी भी दुर्घटना होनी की संभावना हो सकती हैं। अभी हाल ही में साहिबाबाद- आनंद विहार रूट पर मालगाड़ी पटरी से उतरने की घटना सामने आयी थी। समय रहते इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो लोको पायलट पर बढ़ रहे दबा की वजह से कब बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
ट्रेनों का विस्तार तेजी से हो रहा है, लेकिन लोको पायलटों की भर्ती उसी रफ्तार से नहीं बढ़ रही, जिसका खामियाजा मौजूदा कर्मचारियों को ही उठाना पड़ रहा है। भोपाल मंडल में प्रतिदिन लगभग 35-40 मालगाड़ियां फ्री क्रू उपलब्ध नहीं होने के कारण खड़ी रहती हैं। साथ ही भोपाल मंडल में 285-290 मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन होता है।
ओवर हॉवर्स में ड्यूटी कर रहे ड्राइवर (लोको पायलट) और गार्ड (ट्रेन मैनेजर) की संख्या:
9 घंटे से अधिक ड्यूटी: 250 मामले प्रति सप्ताह
12 घंटे से अधिक ड्यूटी: लगभग 50 मामले प्रति सप्ताह
14 घंटे से अधिक ड्यूटी: 20–25 मामले प्रति सप्ताह
शारीरिक-मानसिक दुष्प्रभाव तथा दुर्घटना की आशंका
लगातार लंबी ड्यूटी से लोको पायलटों में थकान, नींद की कमी, तनाव, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मानसिक दबाव और एकाग्रता में कमी की समस्या बढ़ रही है। इसका असर सिग्नल पर प्रतिक्रिया, गति नियंत्रण और ब्रेकिंग पर पड़ने से परिचालन प्रभावित होने तथा रेल दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, लोको पायलटों पर बढ़ते कार्यभार की प्रमुख वजह ट्रेनों की बढ़ती संख्या, कई रेलखंडों पर सीमित ट्रैक क्षमता और परिचालन संबंधी बाधाएं हैं। ट्रेन लेट होने, तकनीकी खराबी या चेन पुलिंग से पूरा सेक्शन प्रभावित होता है। दबाव कम करने के लिए बेहतर क्रू प्रबंधन और नियमित मानिटरिंग की जा रही है।
"ट्रेनों की संख्या बढ़ने के बावजूद पर्याप्त भर्ती नहीं होने से मौजूदा कर्मचारियों पर कार्यभार लगातार बढ़ रहा है। कई बार 9 से 14 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ती है। समय पर भर्ती और पर्याप्त क्रू उपलब्ध होने से कार्यभार घटेगा तथा संचालन अधिक सुरक्षित होगा।"
-लोकेश गौस्वामी, रिटायर्ड लोको पायलट
"भोपाल मंडल में हाल ही में 178 नए सहायक लोको पायलट (एएलपी) नियुक्त किए गए हैं, जिससे परिचालन व्यवस्था मजबूत होने और कार्यभार कम होने की उम्मीद है। मालगाड़ी चालक की कुल ड्यूटी अवधि में ट्रेन का इंतजार, वास्तविक संचालन और ड्यूटी के बाद मुख्यालय लौटने का समय भी शामिल होता है। वास्तविक ट्रेन संचालन सामान्यत नौ घंटे से कम रहता है। वहीं, मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में निर्धारित लिंक होने से लोको पायलट 7-8 घंटे ही ट्रेन चलाते हैं।"
- पंकज त्यागी, डीआरएम, भोपाल