प्रियंका गांधी की वैज्ञानिक वी. कामकोटि पर विवादित टिप्पणी:

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भारतीय संस्कृति का अपमान कांग्रेस की पुरानी सोच का परिचायक: डॉ. आर. एच. लता, भारतीय योगिनी महासंघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, गोमूत्र पर राजनीति नहीं, वैज्ञानिक शोध और संवाद होना चाहिए;

प्रियंका वाड्रा की आईआईटी मद्रास प्रमुख वैज्ञानिक वी. कामकोटि पर अप्रत्यक्ष अभद्र टिप्पणी पर विवाद बढ़ा

Tropic Reporters, संदीप सिंह, भोपाल, 29 जुलाई 2026:

डॉ. आर. एच. लता, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय योगिनी महासंघ

भारतीय योगिनी महासंघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आर. एच. लता ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी द्वारा सुप्रसिद्ध सूचना प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक एवं वी. कामकोटि के गोमूत्र संबंधी वक्तव्य पर की गई टिप्पणी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व का भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और देश की प्राचीन ज्ञान-विरासत के प्रति उपेक्षापूर्ण दृष्टिकोण कोई नई बात नहीं है। बिना अध्ययन और तथ्यों के भारतीय परंपराओं का उपहास करना केवल राजनीतिक मानसिकता को दर्शाता है।

डॉ. लता ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक जीवनशैली पर शोध कर रही है। गोमूत्र सहित अनेक पारंपरिक विषयों पर देश-विदेश के विभिन्न संस्थानों में अनुसंधान हो रहे हैं। ऐसे समय में भारत के ही कुछ राजनीतिक नेताओं द्वारा अपने वैज्ञानिकों और भारतीय परंपराओं का उपहास करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौमाता का स्थान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, पर्यावरण, ग्राम्य अर्थव्यवस्था और पारंपरिक जीवन-पद्धति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। वेदों, उपनिषदों, आयुर्वेद तथा अन्य प्राचीन ग्रंथों में गाय के महत्व का विस्तृत उल्लेख मिलता है। ऐसे विषयों पर गंभीर विमर्श होना चाहिए, न कि उपहास।

डॉ. लता ने कहा कि उनका स्वयं का एक व्यक्तिगत अनुभव भी गोमूत्र से जुड़ा है। बचपन में बाल झड़ने की समस्या होने पर उनकी माताजी ने पारंपरिक घरेलू ज्ञान के आधार पर कुछ दिनों तक ताज़ा गोमूत्र सिर पर लगाने की सलाह दी थी, जिससे उन्हें लाभ का अनुभव हुआ। बाद में उन्होंने अपने बच्चों के साथ भी यही पारंपरिक उपाय अपनाया और सकारात्मक परिणाम देखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत अनुभव है और इसे किसी सार्वभौमिक चिकित्सा उपचार अथवा वैज्ञानिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या में योग्य चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन भारतीय ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिकों और सांस्कृतिक विरासत का उपहास करना उचित नहीं है। यदि किसी विषय पर असहमति है तो उसका उत्तर शोध, तर्क और वैज्ञानिक परीक्षण से दिया जाना चाहिए, न कि व्यंग्य और राजनीतिक कटाक्ष से। डॉ. लता ने कहा कि कांग्रेस को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं पर टिप्पणी करने से पहले उनका गंभीर अध्ययन करना चाहिए। देश की प्राचीन ज्ञान-विरासत पर राजनीति करने के बजाय उसके वैज्ञानिक परीक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध सभ्यताओं में से एक है और प्रत्येक भारतीय का दायित्व है कि वह उसका सम्मान करे तथा आने वाली पीढ़ियों तक उसके ज्ञान को पहुंचाने का कार्य करे।

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