सीहोर: कागजों पर बनी सड़कें

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सीहोर के रामपुरा में लाखों के सड़क घोटाले की आशंका, पंचायत दर्पण पोर्टल एवं ई-ग्राम स्वराज पोर्टल ने खोली पोल

कागजों पर बनी सड़कें, कीचड़ में चलती जिंदगी

Tropic Reporters, संदीप सिंह, सीहोर/भोपाल, 28 जुलाई 2026:

कीचड़ के बीच गायब सड़क

कीचड़ भरी सड़क पर चलने को मजबूर लोग

प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और सड़क निर्माण के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन सीहोर जिले की ग्राम पंचायत कल्याणपुरा धाकड़ के अंतर्गत आने वाले ग्राम रामपुरा की तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यहां ग्रामीण आज भी बरसात में कीचड़, जलभराव और बदहाल रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। आरोप है कि जिन सीसी सड़कों के निर्माण के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, वे आज भी धरातल पर मौजूद नहीं हैं।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह जिला प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का गृह जिला है। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस कथित घोटाले पर क्यों नहीं पड़ी?

पोर्टलों पर दर्ज है निर्माण, लेकिन जमीन पर नहीं सड़क

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत द्वारा भारत सरकार के पंचायत दर्पण पोर्टल और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर कई सड़क निर्माण कार्य पूर्ण दर्शाकर उनकी राशि आहरित कर ली गई, जबकि मौके पर सड़कें बनी ही नहीं। सूत्रों के अनुसार जो निर्माण कार्य कागजों में पूरे दिखाए गए उनमें,

  1. मोहन पर्वत के मकान से देवकरण मालवीय के मकान तक सीसी सड़क (एक्टिविटी कोड़ - 45851409)
  2. प्रेम नारायण टेलर के मकान से चौकीदार के मकान तक सीसी सड़क (वर्क आईडी 101317657)
  3. प्रेम नारायण टेलर के मकान से सुरेश पुरी के मकान तक सीसी रोड़ ( एक्टिविटी कोड़ - 45851409)
  4. अमरपुरी के मकान से बिशनखेड़ी के काकड़ तक ग्रेवल सड़क ( एक्टिविटी कोड़ - 45852783)
  5. सी. सी रोड़ निर्माण पुलिया से घिरनी वाली कुंडी तक (एक्टिविटी कोड़ -100022304) और अन्य सड़क भी हैं।









ग्रामीणों का दावा है कि इनमें से अधिकांश सड़कें या तो बनी ही नहीं हैं या फिर एक ही सड़क को अलग-अलग नामों से दो से तीन बार दर्शाकर भुगतान निकाल लिया गया।

फोटो किसी और सड़क की, भुगतान किसी और का

मामले में सबसे गंभीर बात यह है कि पंचायत ने निर्माण कार्यों के सत्यापन के लिए दूसरे स्थानों की तस्वीरें पोर्टल पर अपलोड कर दीं और उसी आधार पर भुगतान भी प्राप्त कर लिया। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड के साथ धोखाधड़ी का मामला भी हो सकता है।

बरसात में श्मशान तक जाने का रास्ता भी नहीं

रामपुरा गांव की वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। ग्राम की मुख्य सड़क जो श्मशान की ओर जाती मोहन पर्वत के मकान से श्मशान घाट तक बारिश के दौरान ये सड़क नाले में तब्दील हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम संस्कार के लिए शव को कमर तक पानी में लेकर श्मशान घाट तक जाना पड़ता है। विकास के दावों के बीच यह तस्वीर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

2022 से हो रही शिकायतें, कार्रवाई शून्य

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2022 से लेकर अब तक जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और अन्य सक्षम अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन आज तक किसी प्रकार की प्रभावी जांच या कार्रवाई नहीं हुई। इससे ग्रामीणों में आक्रोश और अविश्वास बढ़ता जा रहा है। इस मामले में बड़ा सवाल यह है कि जब पंचायत दर्पण पोर्टल और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर सड़क निर्माण पूर्ण दर्शाया गया है, तो मौके पर सड़कें कहां हैं?

यदि सड़कें बनीं, तो उनका भौतिक सत्यापन किस अधिकारी ने किया। एक ही सड़क को दो से तीन बार दिखाकर सरकारी राशि निकाली गई, इसके लिए जिन लोगों पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अलावा निर्माण की तस्वीरें किस आधार पर स्वीकृत की गईं तथा 

वर्षों से शिकायतों के बावजूद जांच क्यों नहीं हुई?

ग्रामीणों ने पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच, वित्तीय ऑडिट और जिम्मेदार अधिकारियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पंचायत दर्पण और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कराया जाए तो कथित लाखों रुपए की सड़क घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आ सकती है।

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