नीट प्रदर्शन:
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का अधिकार, दोषियों पर होगी कार्रवाई;
Tropic Reporters, Digital desk, भोपाल, 28 जुलाई 2026:
संसद मार्च के दौरान 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों की सुनवाई मंगलवार को भी सुप्रीम कोर्ट में जारी रही। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट कहा कि यदि जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। अदालत ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।
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| चीफ जस्टिस सूर्यकांत |
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मामला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश, बिहार और नागपुर समेत कई राज्यों से जुड़े आरोप सामने आए हैं। इसी वजह से सभी याचिकाओं को दिल्ली हाईकोर्ट भेजने के बजाय सुप्रीम कोर्ट स्वयं सुनवाई कर रहा है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन, शोएब आलम, श्याम दीवान और प्रशांत भूषण ने पुलिस पर पेलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज, आंसू गैस, सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा, महिला प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों से मारपीट जैसे गंभीर आरोप लगाए। अदालत को बताया गया कि एक 19 वर्षीय युवक की पेलेट गन से आंखों की रोशनी चली गई, एक युवती को आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा और कील लगी लाठियों के इस्तेमाल के भी आरोप हैं।
चीफ जस्टिस ने कहा कि इन सभी आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि जिम्मेदारी तय नहीं होगी तो जांच का कोई अर्थ नहीं रहेगा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि सभी घटनाओं की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जा सकता है और उसकी संरचना पर बाद में निर्णय लिया जाएगा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का पूरा अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस घटनाक्रम में करीब 250 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन हमलों की भी निष्पक्ष जांच होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हमला छात्रों ने किया था या आंदोलन में शामिल असामाजिक तत्वों ने।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 2018 में जारी पुलिस कार्रवाई संबंधी दिशा-निर्देशों की समीक्षा की आवश्यकता भी जताई। पीठ ने कहा कि बदलते समय के अनुसार विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए नए और स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके। मामले की अगली सुनवाई में SIT के गठन और जांच की रूपरेखा पर अदालत आगे विचार करेगी।
