राष्ट्रीय मानव संग्रहालय; माह का विशेष प्रादर्श “मनसा बाड़ी/मनसा घट – एक कलात्मक अभिव्यक्ति”
‘मनसा बाड़ी/मनसा घट’ माह के प्रादर्श का मानव संग्रहालय में लोकार्पण हुआ, पश्चिम बंगाल की लोकशिल्प परंपरा और धार्मिक आस्था की कलात्मक अभिव्यक्ति को दर्शाता है ‘मनसा घट’;
‘मनसा घट’ प्रादर्श आगामी एक माह तक दर्शकों के अवलोकन हेतु उपलब्ध रहेगा
Tropic Reporters, अपर्णा मिश्रा, भोपाल, 28 अगस्त 2026:

मानव संग्रहालय: माह का विशेष प्रादर्श 'मनसा बाड़ी/मनसा घट-कलात्मक अभिव्यक्ति'
भोपाल स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में शुक्रवार शाम को अगस्त माह के विशेष प्रादर्श “मनसा बाड़ी/मनसा घट – एक कलात्मक अभिव्यक्ति” का लोकार्पण किया गया। लोकार्पण आईटीडीए, भद्राचलम (तेलंगाना) के प्रोजेक्ट ऑफिसर श्री बी. राहुल के द्वारा किया गया। इस अवसर पर संग्रहालय के निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिताभ पांडे ने मुख्य अतिथि का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं संग्रहालय का स्मृति-चिह्न भेंट कर किया।
मनसा बाड़ी/मनसा घट
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| विशेष प्रादर्श का लोकार्पण प्रोजेक्ट ऑफिसर आईटीडीए, भद्राचलम बी. राहुल ने किया |
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| मुख्य अतिथि बी. राहुल का स्वागत करते संग्रहालय निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिताभ पांडे |
माह के प्रादर्श के संयोजक एवं संग्रहालय के सहायक कीपर राजेन्द्र झारिया ने उपस्थित अतिथियों एवं दर्शकों को ‘मनसा घट’ के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि पश्चिम बंगाल के बाँकुड़ा जिले के कोडकुनी गाँव से डॉ. सुदीपा रॉय द्वारा संकलित यह प्रादर्श नारियल के खोल से निर्मित एक विशिष्ट लोककलाकृति है। इस प्रकार की कलाकृतियों में नारियल के खोल को आकार देकर उस पर नाग, सर्पफण तथा अन्य पारंपरिक एवं धार्मिक आकृतियों का सूक्ष्म अंकन किया जाता है। यह शिल्प स्थानीय लोकविश्वासों, धार्मिक प्रतीकों और कलात्मक अभिव्यक्ति का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है।
उन्होंने बताया कि बाँकुड़ा क्षेत्र टेराकोटा, डोकरा, मिट्टी की मूर्तिकला सहित अपनी समृद्ध लोक एवं हस्तशिल्प परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। ‘मनसा घट’ इसी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा में प्राकृतिक सामग्री के रचनात्मक उपयोग और धार्मिक आस्था की अभिव्यक्ति का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।
इस अवसर पर संग्रहालय के जनसंपर्क अधिकारी श्री हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि ‘मनसा बाड़ी/मनसा घट’ प्रादर्श के माध्यम से पश्चिम बंगाल की पारंपरिक शिल्प परंपरा, स्थानीय धार्मिक मान्यताओं तथा प्राकृतिक सामग्री के रचनात्मक उपयोग को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। यह प्रादर्श संग्रहालय की अंतरंग दीर्घा ‘वीथि संकुल’ में प्रदर्शित किया गया है, जहाँ दर्शक पारंपरिक जीवन, लोकविश्वास एवं लोककला की विविध अभिव्यक्तियों से परिचित हो सकेंगे।
कार्यक्रम में संग्रहालय के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. पी. शंकर राव, तपस विश्वास, डॉ. मोहन लाल, कुणाल कश्यप, डॉ. शिखा तहनगुरिया, इन्द्रसेन वानखेड़े, ललित बागुल धरणीधर सेनापति, अतुल पांडे , शिव कुमार शर्मा, श्रेय पवाँर सहित संग्रहालय के अधिकारी-कर्मचारी, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संग्रहालय के प्रकाशन अधिकारी डॉ. मोहम्मद रेहान ने किया।




