खुलासा: आम आदमी पार्टी ने अमृतसर के पुलिस कमिश्नर और पंजाब बॉर्डर रेंज के डीआईजी गुरप्रीत सिंह भुल्लर को उनके पद से हटाया

🎧 सुनें:

अमृतसर के पुलिस कमिश्नर और पंजाब बॉर्डर रेंज के डीआईजी गुरप्रीत सिंह भुल्लर को उनके पद से हटाया गया, आम आदमी पार्टी ने श्री भुल्लर का नाम प्रतीक्षा सूची में डाला गया;

पाकिस्तानी ISI के 12 आतंकी पकड़े थे, जंतर मंतर पर बम ब्लास्ट के षडयंत्र का खुलासा किया था

Tropic Reporters, Digital desk, पंजाब/भोपाल, 07 अगस्त 2026:

IPS गुरप्रीत सिंह भुल्लर: पाकिस्तानी ISI संचालित दो आतंकी मॉड्यूल्स ध्वस्त किया

जिस बात की आशंका थी वही हुआ, पंजाब की आम आदमी पार्टी ने अमृतसर के पुलिस कमिश्नर और पंजाब बॉर्डर रेंज के डीआईजी गुरप्रीत सिंह भुल्लर को उनके पद से हटा कर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया है।

डीआईजी भुल्लर ने हाल ही में खुलासा किया था कि पाकिस्तान के ISI के द्वारा 12 आतंकी भेजे गए थे, जो जंतर मंतर पर बम ब्लास्ट करके अफरातफरी मचाना चाहते थे। उन्होंने मीडिया के सामने पकड़े गए आतंकियों को भी पेश किया था।

IPS गुरप्रीत सिंह भुल्लर को पद से हटाने का आदेश

परन्तु उनके इतने बड़े काम के बदले पंजाब की आम आदमी पार्टी ने ईनाम के रूप में श्री भुल्लर को उनके पद से ही हटा दिया है। इतना ही नहीं, उन्हें कोई पद देने के स्थान पर दण्ड के रूप में उनका नाम प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया।

सम्भवतः अपने ही पुलिस अधिकारी के इस खुलासे से आम आदमी पार्टी का पूरा नेरेटिव बिगड़ रहा था, क्योंकि अब यह बिल्कुल भी छुपा नहीं है कि विदेशी फंडिंग के साथ ही आम आदमी पार्टी ने ही जंतर मंतर के हंगामे को प्रायोजित किया था। इसीलिए पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार ने डीआईजी गुरप्रीत सिंह भुल्लर को उनके पद से हटकर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया।

अमृतसर के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान समर्थित आईएसआई (ISI) के दो आतंकी मॉड्यूल्स का भंडाफोड़ किया था। इस खुलासे के 3 दिन बाद ही एक राजनीतिक विवाद के बीच 7 अगस्त 2026 को पंजाब सरकार ने अचानक उनका तबादला कर दिया है।

मॉड्यूल का पर्दाफाश:

गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने 4 अगस्त 2026 को एक प्रेस वार्ता में बताया था कि अमृतसर पुलिस ने सीमा पार से संचालित दो ISI समर्थित आतंकी मॉड्यूल्स को ध्वस्त कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 4 नाबालिग शामिल हैं।

जंतर-मंतर पर हमले की साजिश:

जांच में सामने आया कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स ने इन आरोपियों (विशेषकर 15-15 साल के बच्चों) को पैसों का लालच देकर ऑनलाइन पेट्रोल बम बनाना सिखाया था।इनमें से 8 आरोपी ट्रेन से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे, जहां उन्हें स्थानीय स्तर पर पेट्रोल बम की सामग्री उपलब्ध कराई गई थी।

दिल्ली और पंजाब पुलिस की मुस्तैदी से हमला टला:

दिल्ली पुलिस की भारी सुरक्षा और मुस्तैदी को देखते हुए आरोपी साजिश को अंजाम नहीं दे पाए और पंजाब लौट आए, जहां उन्हें गिरफ्तार किया गया। उनके पास से पेट्रोल बम, हथियार और कारतूस बरामद हुए हैं।

सोशल मीडिया पर विवाद, पंजाब पुलिस का स्पष्टीकरण:

इस खुलासे के बाद भाजपा (BJP) के कई सोशल मीडिया हैंडल्स ने भुल्लर की वीडियो क्लिप शेयर करते हुए कि जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शन के पीछे सीधे तौर पर ISI का हाथ होने का दावा किया। विवाद बढ़ता देख कर पंजाब पुलिस ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया। पुलिस ने कहा कि कमिश्नर के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

गुरप्रीत सिंह भुल्लर का अचानक तबादला:

इस विवाद के तुरंत बाद, 7 अगस्त 2026 को पंजाब सरकार के गृह विभाग ने आदेश जारी कर गुरप्रीत सिंह भुल्लर को अमृतसर पुलिस कमिश्नर के पद से हटा दिया।उन्हें फिलहाल कोई नई पोस्टिंग नहीं दी गई है और अगले आदेश तक डीजीपी (DGP) कार्यालय में रिपोर्ट करने को कहा गया है।उनकी जगह बॉर्डर रेंज के डीआईजी (DIG) हरमनबीर सिंह गिल को अमृतसर पुलिस कमिश्नर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

 राजनीतिक घमासान:

हालांकि सरकार ने इस फेरबदल को "प्रशासनिक आधार" पर किया बताया है, लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर विपक्षी दलों विशेषकर भाजपा नेताओं ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर सवाल उठाए हैं। नेताओं का आरोप है कि जंतर-मंतर की आतंकी साजिश का सच सामने लाने के कारण ही ईमानदार पुलिस अफसर पर यह कार्रवाई की गई है।

यह कुछ उसी तरह की कार्रवाई हुई है, जैसे UPA सरकार के दौर में भारत के 36 शहरों में सीरियल ब्लास्ट हुए थे। 22 ट्रेनों में ब्लास्ट हुए। उसके अलावा मुंबई लोकल में ब्लास्ट हुए और सबसे बड़ा 29/11 का मुंबई पर आतंकी हमला हुआ था। यह सब इसलिए हुआ, क्योंकि आईबी के अधिकारी कर्तव्य पालन के बाद भी सरकार द्वारा अपने ही ऊपर दण्डात्मक कार्रवाई से डरे हुए थे। इसीलिए IB अपना काम ही नहीं कर रही थी।

जब सेंट्रल आईबी ने गुजरात पुलिस को लश्कर ए तैयबा की आतंकी इशरत जहां के बारे में सूचना दी और इशरत जहां अपने साथी आतंकवादियों के साथ मारी गई, तब केंद्र की मनमोहन सरकार ने IB के तीन अधिकारियों सहित गुजरात और राजस्थान कैडर के 22 से ज्यादा पुलिस अधिकारियों को जेल में डाल दिया था।

उससे आईबी विभाग इतना हताश हो गया था कि उन्होंने आतंकियों की कोई सूचना सरकार को देनी बंद कर दी। इसके परिणाम में पूरे भारत के शहरों में सीरियल ब्लास्ट, आतंकवाद और आम लोगों की मौत से रोजमर्रा की बात हो गई।

अब पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार भी अब वही कर रही है। आतंकवादियों का खुलासा करने के बाद अपने ही पुलिस अधिकारी को पद से हटा दिया।

अब अपेक्षा केन्द्र सरकार से ही रह जाती है कि ऐसे साहसी पुलिस अधिकारी को केंद्रीय सुरक्षा विभाग में नियुक्त करे।


📝 सारांश:
सारांश लोड हो रहा है...
🔗 संबंधित लिंक: