नन्द घर आनन्द की रौनक:

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श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बाजार में बढ़ी चहल-पहल, जन्माष्टमी पर बदला कान्हा का श्रृंगार, श्रृंगार किट में डायमंड झूले से लेकर अष्टधातु की पोशाक की बढ़ी डिमांड;

त्यौहार पर 20-22 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान

03 सितंबर 2026, Tropic Reporters, अंज ठाकुर, भोपाल:

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर जगमग बाजार
श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भोपाल के चौक बाजार, इतवारा, बैरागढ़, न्यू मार्केट और एमपी नगर के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। पिछले चार दिनों में इन बाजारों में ग्राहकों की भीड़ करीब दोगुनी हो गई है। इस बार लोगों की पसंद भी बदली नजर आ रही है। पहले जहां लड्डू गोपाल के लिए केवल पोशाक, मुकुट या झूला खरीदा जाता था, वहीं अब लोग पूरा श्रृंगार किट एक साथ खरीद रहे हैं। इसमें पोशाक के साथ मुकुट, बांसुरी, माला, आसन, झूला, पायल और अन्य सजावटी सामान शामिल हैं। पटेल नगर सहित शहर के बड़े मंदिरों में भी जन्माष्टमी की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।
त्योहार पर दुकानों पर रौनक, महंगाई का असर कम
हिन्दू त्योहार पर करोड़ों के व्यापार की संभावना
20 से 22 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान
व्यापारियों के अनुसार भोपाल में जन्माष्टमी से जुड़े पूजन, पोशाक, श्रृंगार और सजावटी सामान का कारोबार पिछले साल करीब 12 से 15 करोड़ रुपए रहा था। इस साल यह कारोबार करीब 20 से 22 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। व्यापारियों का कहना है कि इस बार कारोबार में करीब 25 से 30 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल रही है। वहीं, एक ग्राहक द्वारा पूजन और श्रृंगार की किट पर खर्च भी बढ़ा है। पिछले साल जहां औसतन 800 से 1200 रुपए खर्च होते थे, इस बार यह बढ़कर करीब 1200 से 1800 रुपए तक पहुंच गया है। इसकी प्रमुख वजह लोग अब केवल एक सामान खरीदने के बजाय कान्हा का पूरा श्रृंगार और झांकी का सामान एक साथ खरीद रहे हैं।
अलग-अलग वेश में कान्हा की मांग
मोरपंख और वृंदावन के राजसी रूप-वेश की ज्यादा मांग
इस बार कान्हा के वस्त्रों में मोरपंख और वृंदावन शाही लुक सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है। मोरपंख वाले मुकुट के साथ हार, फूल, पायल और बांसुरी का काम्बिनेशन ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है। राजस्थान और वृंदावन से आए रंग-बिरंगे डिजाइनर वस्त्रों में जरी, मोती, स्टोन और जरदोजी का काम किया गया है। अष्टधातु वर्क वाली प्रीमियम पोशाकें भी बाजार में उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत करीब 2100 से 4100 रुपए तक है। कुछ विशेष डिजाइन की पोशाकों की कीमत इससे भी अधिक है।
महँगे जड़ाऊ झूले बड़ी संख्या में उपलब्ध
महंगी धातुओं के झूलों की बड़ी मांग
डायमंड जड़ित झूले और रेशम की गद्दी बनी आकर्षण
कान्हा को झूला झुलाने के लिए इस बार बाजार में पारंपरिक झूलों के साथ नए डिजाइन भी आए हैं। डायमंड जड़ित झूले, मोती और स्टील से बने झूले, नक्काशीदार सिंहासन और आकर्षक आसन ग्राहकों की पसंद बने हुए हैं। झूलों की कीमत 100 रुपए से शुरू होकर करीब 3000 रुपए तक है। व्यापारियों के मुताबिक मोती-स्टील वाले झूलों की बिक्री पिछले साल की तुलना में करीब तीन गुना बढ़ी है। इसके अलावा रेशम की गद्दी-तकिया, मोती की माला और डायमंड जड़ित बांसुरी भी नए कलेवर में उपलब्ध हैं।

150-1000 रुपए तक बच्चों की राधारानी-कान्हा ड्रेस

बच्चों के लिए भी बाजार में रेडी-टू-वियर राधारानी और कान्हा की ड्रेस की नई रेंज आई है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार अभिभावक ऐसी ड्रेस ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जिन्हें बच्चों को आसानी से पहनाया जा सके और जिनका फैब्रिक साफ्ट हो। कान्हा की ड्रेस में धोती, पटका, पांच लेयर की माला, कमरबंद, कुंडल और बाजूबंद का पूरा सेट मिल रहा है। राधारानी के लिए लहंगा-चोली के साथ दुपट्टा, बाजूबंद और फूलों वाली हेयर एक्सेसरीज वाले सेट भी उपलब्ध हैं। बच्चों की ड्रेस करीब 150 से 1000 रुपए तक की रेंज में हैं। वहीं डिजाइनर पोशाकें 2100 से 4100 रुपए तक में उपलब्ध हैं।

बांधनी, गोटा-पत्ती और पेस्टल रंगों का नया ट्रेंड

राधारानी की पोशाक में इस बार राजस्थानी बांधनी और गोटा-पत्ती वर्क की मांग है। हल्के बार्डर और बारीक कढ़ाई वाली पोशाकें देखने में भारी लगती हैं, लेकिन वजन में हल्की हैं। पारंपरिक लाल और पीले रंग के साथ पेस्टल पिंक, मिंट ग्रीन और लैवेंडर रंग भी ग्राहकों को पसंद आ रहे हैं। छोटे बच्चों के लिए काटन और साफ्ट फैब्रिक वाली ड्रेस पर ज्यादा जोर है, ताकि कपड़े से चुभन न हो।

मुकुट, बांसुरी और माला भी उचित मूल्य में उपलब्ध

भोपाल के बाजारों में लड्डू गोपाल की मूर्तियां करीब 110 से 5000 रुपए तक मिल रही हैं। वस्त्रों की शुरुआती कीमत 10 रुपए है, जबकि सामान्य डिजाइन करीब 450 रुपए तक और डिजाइनर पोशाकें 2100 से 4100 रुपए तक हैं। मुकुट और पगड़ी 20 से 400 रुपये, बांसुरी 20 से 300 रुपये और माला 5 से 250 रुपये तक में उपलब्ध हैं। झांकियों के लिए कृत्रिम फूलों की लड़ियां, तैयार बैकड्राप, लोटस शेप फाउंटेन और अन्य सजावटी सामान भी बाजार में मिल रहे हैं। मंदिर और घर की झांकी को आकर्षक बनाने के लिए लोग इन रेडीमेड सामानों को भी खरीद रहे हैं।

एक पोशाक तैयार करने में लगते हैं 2-3 घंटे

न्यू मार्केट व्यापारी महासंघ के संजय वालेचा ने बताया कि मंदिरों के आसपास की दुकानों पर हर तरह के यूनिक सामान उपलब्ध हैं। लोगों की च्वाइस पहले से बढ़ गई है और अब ग्राहक हर बार कुछ नया खरीदना चाहते हैं। इसी वजह से इस बार नए डिजाइन के मुकुट, पोशाक, झूले और श्रृंगार सामग्री की मांग ज्यादा है।व्यापारियों के मुताबिक डिजाइनर पोशाक तैयार करने में दो से तीन घंटे तक का समय लगता है। जन्माष्टमी से पहले एक सप्ताह में इतनी बिक्री हो जाती है, जो सामान्य दिनों में करीब एक महीने में होती है। यही वजह है कि दुकानदारों ने इस बार पहले से ही अलग-अलग डिजाइन और रंगों में स्टॉक तैयार कर लिया था।

लोगों की नई पसन्द से बाजार में 20-30% का उछाल

न्यू मार्केट व्यापार संरक्षण समिति के उपाध्यक्ष और भोपाल चेंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव अजय देवनानी ने बताया कि जन्माष्टमी को लेकर न्यू मार्केट में कारोबार में करीब 20 से 30 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है। इस बार अवकाश भी है, इसलिए लोग परिवार के साथ खरीदारी कर रहे हैं और तैयारियां भी पहले से कर रहे हैं।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर भोपाल बाजार 2026:-

- लड्डू गोपाल मूर्ति: 110 से 5,000 रुपये

- वस्त्र: 10 से 450 रुपये (डिजाइनर 2100-4100 रुपये तक)

- झूला: 100 से 3000 रुपये, मोती-स्टील वाले झूलों की बिक्री 3 गुना बढ़ी

- मुकुट-पगड़ी: 20 से 400 रुपये, बांसुरी 20-300 रुपये

- माला 5 से 250 रुपये

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