डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से माल परिवहन तंत्र को मिल रही नई गति:

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डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भारत के माल परिवहन तंत्र को दे रहे नई गति, DFCCIL द्वारा विकसित नेटवर्क देश के औद्योगिक केंद्रों को विश्वसनीय और अधिक ऊर्जा-कुशल रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध करा रहा;

07 सितम्बर 2026, Tropic Reporters, अंज ठाकुर, नई दिल्ली/भोपाल:

देश में माल परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स तंत्र में DFC के परिचालन से व्यापक परिवर्तन
भारत के माल परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स तंत्र में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के परिचालन से व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) द्वारा विकसित यह नेटवर्क देश के प्रमुख औद्योगिक, विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक्स केंद्रों को उच्च क्षमता, तेज, विश्वसनीय और अधिक ऊर्जा-कुशल रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध करा रहा है।

DFC केवल अतिरिक्त रेल क्षमता उपलब्ध कराने वाली परियोजना नहीं है, बल्कि यह माल परिवहन की गति, क्षमता, विश्वसनीयता और उत्पादकता को बढ़ाने वाला राष्ट्रीय अवसंरचना तंत्र बन चुका है। रेल नेटवर्क के लगभग 4 प्रतिशत हिस्से पर 14 प्रतिशत से अधिक रेलवे माल परिवहन संभालने की क्षमता DFC की उच्च उत्पादकता एवं संसाधनों के प्रभावी उपयोग को दर्शाती है।

2,843 किमी उच्च क्षमता का DFC नेटवर्क

DFC नेटवर्क में 1,337 किलोमीटर लंबा ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC), जो पंजाब के न्यू साहनेवाल से बिहार के न्यू सोननगर तक तथा 1,506 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC), जो उत्तर प्रदेश के न्यू दादरी से महाराष्ट्र के न्यू जेएनपीटी तक जुड़ा है, शामिल है।

दोनों कॉरिडोर मिलकर लगभग 2,843 किलोमीटर लंबा उच्च क्षमता वाला माल रेल नेटवर्क बनाते हैं, जो देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, उत्पादन केंद्रों, उपभोग बाजारों तथा बंदरगाहों के बीच माल परिवहन को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

वेस्टर्न DFC का जेएनपीटी तक पूर्ण परिचालन

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि 31 मार्च 2026 को हासिल हुई, जब लगभग 102 किलोमीटर लंबे वैतरणा–जेएनपीटी सेक्शन का कार्य पूर्ण हुआ। इसके साथ ही संपूर्ण वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परिचालन में आ गया।

WDFC के इस महत्वपूर्ण सेक्शन के पूर्ण होने से मालगाड़ियों का जेएनपीटी तक निर्बाध संचालन संभव हुआ है। विशेष रूप से डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनों के संचालन से एक ही ट्रेन में अधिक मात्रा में कंटेनरीकृत माल परिवहन किया जा सकता है, जिससे रेल माल परिवहन की क्षमता एवं उत्पादकता में वृद्धि होती है।

जेएनपीटी तक WDFC के पूर्ण परिचालन से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित देश के प्रमुख उत्पादन एवं उपभोग केंद्रों का पश्चिमी तट के महत्वपूर्ण समुद्री कंटेनर गेटवे से रेल संपर्क और मजबूत हुआ है। इससे बंदरगाहों और देश के आंतरिक क्षेत्रों के बीच माल की आवाजाही अधिक सुव्यवस्थित एवं विश्वसनीय बनाने में सहायता मिलेगी।

DFC नेटवर्क बड़े पैमाने पर कर रहा माल परिवहन

DFC नेटवर्क के बढ़ते उपयोग का प्रमाण इसके परिचालन आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। 31 अगस्त 2026 तक DFCCIL द्वारा लगभग 5.21 लाख मालगाड़ी ट्रिप संचालित की जा चुकी हैं। नेटवर्क पर प्रतिदिन औसतन लगभग 435 मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं।

इन मालगाड़ी परिचालनों से लगभग 658 बिलियन ग्रॉस टन किलोमीटर (GTKM) का फ्रेट प्रदर्शन दर्ज किया गया है, जबकि दैनिक औसत लगभग 592 मिलियन GTKM रहा। इसी प्रकार, लगभग 360 बिलियन नेट टन किलोमीटर (NTKM) का माल परिवहन प्रदर्शन दर्ज किया गया है, जिसका दैनिक औसत लगभग 323 मिलियन NTKM है।

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि DFC देश में उच्च क्षमता वाले समर्पित रेल माल परिवहन के एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है।

माल और यात्री परिवहन दोनों के लिए लाभ

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का प्रमुख उद्देश्य मालगाड़ियों को यात्री प्रधान पारंपरिक रेल मार्गों से अलग करना है। इससे माल परिवहन के लिए अतिरिक्त क्षमता और परिचालन में अधिक लचीलापन मिलता है, वहीं मौजूदा भारतीय रेल नेटवर्क पर यात्री सेवाओं के लिए भी क्षमता उपलब्ध होती है।

माल परिवहन के लिए समर्पित मार्ग उपलब्ध होने से पारंपरिक मार्गों पर भीड़भाड़ कम करने, यात्री ट्रेनों की समयपालन क्षमता बेहतर करने तथा भविष्य में अतिरिक्त यात्री सेवाओं एवं बेहतर गति के लिए अवसर तैयार होते हैं।

इस प्रकार DFC का लाभ केवल माल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्री रेल सेवाओं और समग्र रेलवे नेटवर्क की दक्षता पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

DFC नेटवर्क के साथ गति शक्ति कार्गो टर्मिनल, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक क्लस्टर, बंदरगाह एवं सड़क नेटवर्क का बेहतर एकीकरण भविष्य में देश की सप्लाई चेन को और अधिक तेज, विश्वसनीय, कुशल एवं प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का विकास केवल एक रेलवे परियोजना नहीं, बल्कि भारत के माल परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स परिदृश्य में एक नए युग की शुरुआत है, जो देश के औद्योगिक विकास, व्यापारिक प्रतिस्पर्धात्मकता और दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान करेगा।

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