वंदे मातरम्: कॉंग्रेस लगातार विवादों को हवा देने पर आतुर
By Tropic Reporters — Friday, September 11, 2026
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कांग्रेस का मुस्लिम वोट बैंक के तुष्टीकरण के लिए कोई सीमा नहीं, वंदे मातरम् विवाद से लगातार उठ रहे सवाल;
11 सितंबर 2026, Tropic Reporters, Digital desk, नई दिल्ली:
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| के सी वेणुगोपाल के वंदे मातरम पर विवादित बयान |
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| जम्मू-कश्मीर सीएम उमर अबदुल्ला वंदे मातरम पर राहुल गांधी के बयान से असहमत |
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| 15 अगस्त को कॉंग्रेस मुख्यालय में पूरे वंदे मातरम पर सोनिया गांधी ने विरोध किया था |
इसके साथ ही कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम् के केवल चुनिंदा छंदों को स्वीकार करने के ऐतिहासिक फैसले को भी 1937 के दौर की राजनीति से जोड़कर सवाल उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, संविधान में ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी’ शब्दों को लेकर भी राजनीतिक बहस छेड़ी जा रही है—ये शब्द मूल संविधान की प्रस्तावना में नहीं थे और 1976 के 42वें संविधान संशोधन के जरिए जोड़े गए थे। हालांकि इस पूरे मुद्दे में इतिहास और वर्तमान राजनीति, दोनों के तथ्यों को अलग-अलग देखना जरूरी है, क्योंकि वंदे मातरम् के आधिकारिक रूप, कांग्रेस के 1937 के निर्णय और 1976 के संविधान संशोधन के पीछे की परिस्थितियां एक जटिल ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रखती हैं।
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