BRICS 2026: दुनिया की निगाहें भारत पर

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मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर, गलवान के बाद रिश्तों की नई परीक्षा, 12 सितंबर को BRICS से इतर होगी द्विपक्षीय बैठक, LAC, व्यापार, निवेश और हाईटेक आयात पर बातचीत की संभावना;

10 सितंबर 2026, Tropic Reporters, Digital desk, नई दिल्ली/भोपाल:

BRICS 2026: संस्थापक राष्ट्रों के प्रतिनिधि
देश की राजधानी नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन भारत और चीन के रिश्तों के लिहाज से बेहद अहम रहने वाला है। सम्मेलन से इतर 12 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। चीन ने जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि कर दी है। करीब सात साल बाद भारत आ रहे चीनी राष्ट्रपति की मोदी से मुलाकात पर सिर्फ दोनों देशों की ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

गलवान की झड़प के 7 साल बाद जिनपिंग की भारत यात्रा
गलवान के बाद पहली बड़ी आमने-सामने बातचीत

2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में बड़ा तनाव पैदा हुआ था। सीमा पर सैन्य गतिरोध के साथ दोनों देशों के आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों पर भी असर पड़ा। हालांकि, पिछले कुछ समय में दोनों पक्षों ने तनाव कम करने और संबंधों को स्थिर करने की दिशा में कदम उठाए हैं।

ऐसे समय में मोदी-शी की संभावित बैठक को आगे की कूटनीतिक दिशा के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। बातचीत में LAC की मौजूदा स्थिति, सीमा पर लंबित मुद्दे और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली अहम विषय हो सकते हैं।

सीमा विवाद के साथ व्यापार भी बड़ा मुद्दा

भारत-चीन संबंध सिर्फ सीमा विवाद तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच बड़ा व्यापारिक संबंध है, लेकिन व्यापार घाटा, बाजार तक पहुंच और निवेश को लेकर भारत की चिंताएं लगातार बनी हुई हैं।

बैठक में हाईटेक उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, जरूरी औद्योगिक सामान और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। भारत की कोशिश चीन पर रणनीतिक निर्भरता कम करने के साथ जरूरी क्षेत्रों में आपूर्ति बनाए रखने की है।

BRICS में भारत के सामने बड़ी जिम्मेदारी

इस बार BRICS की अध्यक्षता भारत कर रहा है। समूह में 11 सदस्य देश हैं और इसका एजेंडा अब केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, तकनीक, निवेश, वैश्विक शासन में सुधार और ग्लोबल साउथ की भूमिका जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।

ऐसे में भारत के लिए BRICS सम्मेलन दो स्तरों पर महत्वपूर्ण है। एक तरफ उसे सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है, वहीं दूसरी तरफ चीन और रूस जैसी बड़ी शक्तियों के साथ अपने रणनीतिक हितों को संतुलित करना है।

पुतिन से भी अहम बातचीत पर नजर

BRICS सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी भी भारत के लिए महत्वपूर्ण होगी। प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की बैठक में क्रूड ऑयल, व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग पर चर्चा की संभावना है। रूस से कच्चे तेल की खरीद भारत की ऊर्जा जरूरतों का अहम हिस्सा रही है।

इसके अलावा रूस के साथ रक्षा क्षेत्र में संभावित समझौतों, सुखोई-57 लड़ाकू विमान, S-400 की शेष आपूर्ति और संयुक्त रक्षा उत्पादन जैसे मुद्दों पर भी नजर रहेगी।

लेकिन BRICS सम्मेलन का सबसे बड़ा कूटनीतिक संदेश मोदी-शी की मुलाकात से निकल सकता है। क्या दोनों देश सीमा तनाव से आगे बढ़कर व्यापार और रणनीतिक सहयोग के लिए नई जमीन तैयार कर पाएंगे? 12 सितंबर की संभावित बैठक इस सवाल का जवाब तलाशने वाली सबसे अहम मुलाकात होगी।

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