विजयदशमी: अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक आज भी प्रासंगिक

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"अधर्म कितना भी शक्तिशाली हो जाए, जीत धर्म की ही होती है": गोविंद सिंह राजपूत;

जैसीनगर में आयोजित दशहरा मिलन समारोह, रावण दहन कार्यक्रम में शामिल हुए मंत्री श्री राजपूत

22 अक्टूबर 2026, Tropic Reporters, संदीप सिंह, भोपाल/जैसीनगर:

दशहरा पर्व पर भगवान श्रीराम-लक्ष्मण का स्वागत-पूजन करते मंत्री राजपूत
बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक विजयादशमी पर्व के अवसर पर जैसीनगर में भव्य रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री तथा सुरखी विधानसभा क्षेत्र के विधायक गोविंद सिंह राजपूत शामिल हुए। रावण दहन देखने के लिए हजारों की संख्या में क्षेत्रवासी, ग्रामीणजन, युवा, महिलाएं और बच्चे पहुंचे। आकर्षक आतिशबाजी, रंग-बिरंगी रोशनी और बाहर से आए गायक कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। पूरे आयोजन के दौरान उत्सव और उल्लास का माहौल रहा। लोगों ने रावण दहन के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और संगीत प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया।

कार्यक्रम में जैसे ही रावण के पुतले का दहन किया गया, पूरा परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। आतिशबाजी की आकर्षक छटा ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने विजयादशमी के इस भव्य आयोजन का आनंद लिया। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और उत्सवी माहौल के संगम ने जैसीनगर के दशहरा आयोजन को विशेष बना दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि विजयादशमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मर्यादा, सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीराम ने अपने जीवन और आदर्शों से पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि अधर्म कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो जाए, अंततः विजय धर्म की ही होती है।

उन्होंने कहा कि रावण के पास अपार शक्ति, ज्ञान और वैभव था, लेकिन अहंकार और अधर्म के कारण उसका अंत हुआ। दूसरी ओर भगवान श्रीराम ने सत्य, मर्यादा, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलते हुए बुराई पर विजय प्राप्त की। यही विजयादशमी का सबसे बड़ा संदेश है। हमें भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए समाज में सत्य, सद्भाव, भाईचारे और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए।

मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि दशहरा हमें अपने भीतर मौजूद अहंकार, अन्याय, बुराई और नकारात्मकता को समाप्त करने की प्रेरणा देता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य और धर्म के मार्ग से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।

भगवान श्रीराम के आदर्शों के साथ बनेगा सशक्त समाज 

मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने इस अवसर पर कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन कर्तव्यनिष्ठा, त्याग, मर्यादा, न्याय और जनकल्याण का अनुपम उदाहरण है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अपने आचरण से बताया कि एक आदर्श व्यक्ति, पुत्र, भाई और शासक के क्या कर्तव्य होते हैं। उनके आदर्श आज भी भारतीय समाज को सही दिशा देने का काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हमारी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास से जोड़ते हैं। रावण दहन के माध्यम से बच्चों और युवाओं को यह सीख मिलती है कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, सत्य और अच्छाई के सामने उसे पराजित होना ही पड़ता है। उन्होंने क्षेत्रवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में एकता, समरसता और सांस्कृतिक चेतना मजबूत होती है। त्योहार केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं होते, बल्कि वे हमें अपने कर्तव्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का भी बोध कराते हैं।

रामलीला के कलाकारों के साथ मंत्री श्री राजपूत
पीएम एवं सीएम के नेतृत्व में भारतीय संस्कृति को मिल रहा सम्मान
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक गौरव को नई पहचान दे रहा है। भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ विकास, जनकल्याण और राष्ट्र निर्माण को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के विकास के साथ धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहे।

मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति की विशेषता है कि वह हमें सत्य, सेवा, सद्भाव और मानवता का संदेश देती है। भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर हमें समाज और राष्ट्र की उन्नति में अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक है, जब समाज में शांति, सद्भाव और आपसी विश्वास कायम रहे।

आतिशबाजी और संगीत प्रस्तुतियों ने बढ़ाई रौनक

जैसीनगर में आयोजित दशहरा उत्सव में धार्मिक आस्था के साथ मनोरंजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आकर्षक संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में बाहर से आए गायक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया। संगीत की धुनों और कलाकारों की प्रस्तुतियों पर उपस्थित लोगों ने खूब आनंद उठाया। रावण दहन के अवसर पर हुई आकर्षक आतिशबाजी ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया। आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी बिखरने के साथ ही पूरा वातावरण उत्सवमय हो गया। हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने इस भव्य दृश्य को देखा और विजयादशमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया। बच्चों में रावण दहन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला, वहीं परिवारों और युवाओं ने भी कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भागीदारी की। धार्मिक आयोजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और संगीत प्रस्तुतियों ने लोगों को एक साथ आने का अवसर दिया।

परंपरा एवं सामाजिक एकता का प्रतीक बना दशहरा उत्सव

जैसीनगर का भव्य रावण दहन कार्यक्रम क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक बना। ऐसे आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाने के साथ आपसी मेलजोल, भाईचारे और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने क्षेत्रवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कामना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली लेकर आए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाकर ही हम एक बेहतर समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।

जैसीनगर में आयोजित भव्य रावण दहन कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म का मार्ग ही सर्वोपरि है तथा समाज की एकता, सांस्कृतिक विरासत और जनभागीदारी ही ऐसे आयोजनों की वास्तविक ताकत है।

इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

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