इनोवेशन: चोरी रोकने प्लेटफार्म पर ही होगी जीआरपी की ड्रिल
रेलवे स्टेशनों पर चोरी रोकने प्लेटफार्म पर ही होगी जीआरपी की सुबह-रात की ड्रिल; ब्रीफिंग में पिछले 12 घंटे की संदिग्ध गतिविधियों की समीक्षा
28 थानों और 20 चौकियों सहित 48 स्थानों पर लागू नई व्यवस्था, प्लेटफार्म से आउटर तक बढ़ेगी निगरानी
24 अक्टूबर 2026, Tropic Reporters, अंज ठाकुर, भोपाल:
रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के मोबाइल और सामान की चोरी रोकने के लिए जीआरपी ने अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव किया है। अब जवानों की सुबह और रात की फाल-इन, ब्रीफिंग, डी-ब्रीफिंग और सुरक्षा ड्रिल थानों या बंद कमरों के बजाय प्लेटफार्म पर यात्रियों के सामने कराई जा रही है। प्रदेश में यह व्यवस्था 28 थानों और 20 पुलिस चौकियों सहित कुल 48 स्थानों पर लागू की गई है। इसका उद्देश्य रेलवे परिसर में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने के साथ संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखकर चोरी की वारदातों को समय रहते रोकना है।
नई व्यवस्था के अंतर्गत् निगरानी करती जीआरपी
दो शिफ्ट में ब्रीफिंग, फिर संवेदनशील स्थानों पर तैनाती
नई व्यवस्था के तहत सुबह और रात की दोनों शिफ्ट में जवान प्लेटफार्म पर एकत्रित होते हैं। यहां अधिकारियों की मौजूदगी में सुरक्षा संबंधी निर्देश दिए जाते हैं। ब्रीफिंग के दौरान पिछले 12 घंटे में सामने आई संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी साझा की जाती है। इसके आधार पर तय किया जाता है कि किस जवान को प्लेटफार्म, पार्किंग, टिकट काउंटर, सर्कुलेटिंग एरिया या आउटर क्षेत्र में निगरानी की जिम्मेदारी दी जाएगी। ड्रिल में अनुशासन, सतर्कता और सुरक्षा प्रोटोकाल का अभ्यास भी कराया जाता है। थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी की मौजूदगी अनिवार्य की गई है, जबकि राजपत्रित अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण कर व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
भीड़ और ट्रेन की धीमी रफ्तार में सर्वाधिक अपराध
रेलवे स्टेशनों पर भीड़ के बीच यात्रियों का ध्यान भटकाकर मोबाइल चोरी करना, बेंच पर सो रहे यात्रियों के बैग उठाना और टिकट काउंटर या ट्रेन के पायदान के पास धक्का-मुक्की के दौरान सामान पार करना चोरी के प्रमुख तरीके हैं। ट्रेन के प्लेटफार्म पर पहुंचने और रवाना होने के समय भी बदमाश यात्रियों की जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। वहीं, आउटर क्षेत्र में ट्रेन की गति धीमी होने पर बदमाशों के ट्रेन में चढ़ने या उतरकर रेलवे ट्रैक के रास्ते भागने की आशंका रहती है। ऐसे स्थानों पर गश्त बढ़ाने और संदिग्धों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
प्लेटफार्म से पार्किंग और आउटर तक निगरानी
जीआरपी की नई व्यवस्था में सर्कुलेटिंग एरिया, पार्किंग स्थल, टिकट काउंटर, प्लेटफार्म और स्टेशन के आउटर क्षेत्र को संवेदनशील मानते हुए निगरानी पर जोर दिया जा रहा है। ट्रेन के आगमन और प्रस्थान के समय जवानों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए जाते हैं। प्लेटफार्म पर नियमित ड्रिल होने से पुलिसकर्मियों की सक्रिय मौजूदगी यात्रियों को भी दिखाई देगी। जीआरपी का उद्देश्य केवल चोरी की वारदात के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर अपराध होने से पहले उसे रोकना है।
दीर्घकालिक प्रक्रिया के रूप में लागू व्यवस्था
जीआरपी ने इस पहल को अल्पकालिक अभियान के बजाय दीर्घकालिक प्रक्रिया के रूप में लागू किया है। इसके तहत नियमित ब्रीफिंग, निर्धारित स्थानों पर जवानों की तैनाती और अधिकारियों के निरीक्षण के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
डीजी रेल, राजा बाबू सिंह के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों पर पुलिस की प्रभावी मौजूदगी सुनिश्चित करना और यात्रियों के मोबाइल व सामान की चोरी रोकने के लिए निगरानी को मजबूत करना है।