मिलावटखोरी पर लगेगी लगाम
‘सांची’ की हाई-टेक लैब से दुग्ध उत्पादों में मिलावट पर लगेगी लगाम
अंज ठाकुर, भोपाल 11 अप्रैल 2026:
मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता जांच को नई मजबूती मिलने जा रही है। मप्र राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ (सांची) ने राजधानी भोपाल स्थित अपने परिसर में करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक केंद्रीय प्रयोगशाला स्थापित की है। इस आधुनिक लैब के शुरू होने के बाद अब दूध और दूध से बने उत्पादों की जांच 100 से अधिक मानकों पर की जा सकेगी, जो प्रदेश में खाद्य सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इस प्रयोगशाला की खासियत यह है कि इसमें दुग्ध उत्पादों में कीटनाशक, एंटीबायोटिक, भारी धातुएं, अफ्लाटॉक्सिन, यूरिया, माल्टोज, चीनी, नमक और तेल जैसी मिलावट या हानिकारक तत्वों की सटीक पहचान की जा सकेगी। अत्याधुनिक मशीनों से लैस यह लैब एक दिन में औसतन 20 नमूनों की गहन जांच करने में सक्षम होगी। इससे न केवल मिलावटखोरों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित दुग्ध उत्पाद भी मिल सकेंगे।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सुविधा का लाभ सिर्फ दुग्ध संघों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम नागरिक भी अपने दूध या दुग्ध उत्पादों की जांच यहां करा सकेंगे। हालांकि इसके लिए एक निर्धारित शुल्क लिया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया अभी तय की जानी है। यह सुविधा पूरे प्रदेश के लोगों के लिए उपलब्ध होगी, जिससे पारदर्शिता और जागरूकता दोनों में बढ़ोतरी होगी।
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न दुग्ध संघों में पहले से प्रयोगशालाएं संचालित हैं, जहां दूध और दही की नियमित जांच की जाती है। लेकिन इन लैब्स की तकनीक अपेक्षाकृत पुरानी है और इनमें एक नमूने की जांच केवल लगभग 22 मानकों पर ही हो पाती है। इन जांचों का मुख्य फोकस वसा और दूध की सामान्य शुद्धता तक ही सीमित रहता है। कीटनाशक, भारी धातुओं और अन्य जहरीले तत्वों की जांच की क्षमता इन प्रयोगशालाओं में नहीं थी। इन सभी लैब्स को मिलाकर प्रतिदिन करीब 50 नमूनों की जांच हो पाती है।
इसके विपरीत, भोपाल की नई केंद्रीय प्रयोगशाला अधिक उन्नत तकनीक से लैस है, जो कम समय में अधिक गहराई से और व्यापक स्तर पर जांच करने में सक्षम होगी। यह प्रयोगशाला केंद्र सरकार की नेशनल डेयरी विकास परियोजना के तहत स्थापित की गई है और इसे नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL) तथा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से मान्यता दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
मप्र राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोवानी के अनुसार, यह प्रयोगशाला दूध की शुद्धता सुनिश्चित करने, मिलावट पर कड़ी निगरानी रखने और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। यह पहल न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करेगी, बल्कि प्रदेश में दुग्ध उद्योग की विश्वसनीयता को भी नई ऊंचाई देगी।

