विश्व परिवार दिवस
विश्व परिवार दिवस: बदलते दौर में भी भोपाल के ये परिवार निभा रहे संयुक्त परिवार की परंपरा;
संस्कार, अपनापन और साथ रहने की भावना से आज भी बनाए है रिश्तों को मजबूत
अंज ठाकुर:भोपाल;15 मई 2026
आज के समय में जहां लोग छोटे परिवारों की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं भोपाल के कुछ परिवार आज भी संयुक्त परिवार की परंपरा को पूरी मजबूती से निभा रहे हैं। 11 मई यानी इंटरनेशनल परिवार दिवस के मौके पर शहर के ऐसे परिवार सामने आए हैं, जहां तीन पीढ़ियां एक साथ रहकर न सिर्फ रिश्तों को संभाल रही हैं, बल्कि आधुनिक सोच के साथ परिवार को जोड़कर भी रख रही हैं। इन परिवारों का मानना है कि संयुक्त परिवार सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि सहयोग, संस्कार और भावनात्मक मजबूती का आधार है।
आधुनिक सोच के साथ 11 सदस्यों का परिवार रह रहा साथ, माता-पिता के संस्कार आज भी बनाए हुए हैं रिश्तों की मजबूत
भोपाल की अरेरा कॉलोनी में रहने वाले डॉ. शशांक अग्रवाल का परिवार आज भी संयुक्त परिवार की मिसाल बना हुआ है। परिवार में 11 सदस्य एक साथ रहते हैं। डा. अग्रवाल बताते हैं कि उनके माता-पिता ने हमेशा परिवार को साथ लेकर चलने की सीख दी। यही कारण है कि माता-पिता के निधन के बाद भी तीनों भाई, उनकी पत्नियां और बच्चे एक ही घर में खुशहाल जीवन जी रहे हैं।वे बताते हैं कि परिवार में किसी पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है। बहू और बेटियों को अपनी पसंद से जीवन जीने की पूरी स्वतंत्रता है। परिवार के सभी सदस्य मेडिकल क्षेत्र से जुड़े हैं और कामकाजी होने के बावजूद हर त्योहार और खुशी साथ मिलकर मनाते हैं। उनका मानना है कि संयुक्त परिवार बच्चों को संस्कार, सुरक्षा और अपनापन देता है, जो आज के समय में बेहद जरूरी है।
एक किचन, 23 सदस्य और ढेर सारा अपनापन, सास के संस्कारों ने परिवार को जोड़े रखा
अलग संस्कृतियां, लेकिन दिल एक, 30 सदस्यों का परिवार बना संयुक्त परिवार की मिसाल
भोपाल के अनयकांत नगर में रहने वाले आदीश जैन का परिवार करीब 30 सदस्यों के साथ संयुक्त परिवार की खूबसूरत तस्वीर पेश कर रहा है। परिवार में अलग-अलग राज्यों और समाजों से आई बहुएं हैं, लेकिन सभी मिल-जुलकर परिवार की परंपरा को निभा रही हैं।आदेश जैन बताते हैं कि उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्होंने परिवार को साथ रहने के संस्कार दिए। यही वजह है कि आज भी पूरा परिवार एक ही छत के नीचे रह रहा है। वे बताते हैं कि उनके बेटे को पुणे में नौकरी मिली थी, लेकिन संयुक्त परिवार का माहौल इतना पसंद था कि उसने वापस भोपाल लौटने का फैसला किया।उनका मानना है कि संयुक्त परिवार में जिम्मेदारियां बंटी होती हैं, इसलिए किसी एक व्यक्ति पर बोझ नहीं पड़ता। वे कहते हैं कि बदलते दौर में भले ही लोग छोटे परिवार पसंद कर रहे हों, लेकिन संयुक्त परिवार जैसा सहयोग, अपनापन और खुशियां कहीं और नहीं मिलतीं।
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शीर्षक-भोपाल-छतरपुर रेल लाइन- गांव-शहर कनेक्टिविटी से विकास को रफ्तार
सिनोप्सिस- भोपाल से छतरपुर तक प्रस्तावित नई ब्राडगेज रेल लाइन भोपाल, रायसेन, सागर और छतरपुर जैसे जिलों को जोड़कर बड़ी राहत देगी। इस प्रोजेक्ट से छात्रों, मरीजों और नौकरीपेशा लोगों को तेज और सस्ता सफर मिलेगा। साथ ही व्यापार, खेती और छोटे उद्योगों को नया बाजार मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। निर्माण के दौरान और बाद में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वहीं पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर यह रेल लाइन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच दूरी कम कर विकास की रफ्तार तेज करेगी।
अंजली तोमर, 300 शब्द, 7 बजे, 9285238487


