NCERT: नई किताब ने छेड़ी नई बहस
By Tropic Reporters — Friday, June 26, 2026
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NCERT की नई किताब में बड़ा बदलाव: कक्षा 9 से संविधान की प्रस्तावना गायब, इमरजेंसी पर नया अध्याय चर्चा में;
नई सोशल साइंस किताब ने छेड़ी नई बहस, शिक्षा से लेकर राजनीति तक चर्चा तेज;
Tropic Reporters, डेस्क, 26 जून 2026:
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने नए सत्र में कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond – Part 1’ जारी की है। नई किताब आते ही शिक्षा जगत और राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि नई पुस्तक में भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) को पहले की तरह शामिल नहीं किया गया है और उसमें मौजूद शब्द - संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणराज्य—की अलग से व्याख्या भी नहीं दी गई है। हालांकि किताब में संविधान निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों पर चर्चा मौजूद है। पहली बार कक्षा 9 में इमरजेंसी पर अलग सेक्शन नई किताब की सबसे चर्चित बात यह है कि इसमें पहली बार 1975–77 की राष्ट्रीय इमरजेंसी को कक्षा 9 स्तर पर विस्तार से शामिल किया गया है। किताब में इसे भारतीय लोकतंत्र के सामने आई बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। इसमें उल्लेख किया गया है कि उस समय अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित हुए, प्रेस पर सेंसरशिप लगी और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था।
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| कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान का नया पाठ्यक्रम फिर चर्चा में है |
जयप्रकाश नारायण आंदोलन को भी जगह
किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने छात्रों और आम लोगों को संगठित कर बिहार और गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े किए। साथ ही 1977 के आम चुनाव को लोकतांत्रिक जवाबदेही का उदाहरण बताया गया है।
चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी फोकस
नई पुस्तक में भारत की चुनाव प्रक्रिया को भी प्रमुखता दी गई है। इसमें बताया गया है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनावों का संचालन बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया है। पुस्तक में भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका, चुनावी नियम, आचार संहिता, ईवीएम, वीवीपीएटी और मतदाता जागरूकता अभियानों का उल्लेख किया गया है। छात्रों को 1977 से 2024 तक के लोकसभा चुनावों के परिणाम और राजनीतिक बदलावों को समझने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है।
क्यों ट्रेंड कर रही है यह किताब?
नई किताब को लेकर सोशल मीडिया और शिक्षा जगत में दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक पक्ष इसे लोकतंत्र के कठिन दौरों को स्कूल स्तर पर पढ़ाने की पहल मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष प्रस्तावना और उससे जुड़े मूल शब्दों को हटाने पर सवाल उठा रहा है। इस बदलाव ने शिक्षा, इतिहास और लोकतांत्रिक मूल्यों की पढ़ाई को लेकर अब एक नई बहस शुरू कर दी है।
क्या बदला और क्या बना रहा?
- संविधान निर्माण पर चर्चा जारी
- प्रस्तावना का पाठ शामिल नहीं
- इमरजेंसी पर नया सेक्शन जोड़ा गया
- लोकतांत्रिक संस्थाओं और अधिकारों पर फोकस बरकरार
- चुनाव प्रक्रिया और नागरिक भागीदारी को विस्तार दिया गया।
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