सुरक्षा स्टाफ ही कम, तो सुरक्षित सफर की गारंटी किसकी!
जब सुरक्षा स्टाफ ही कम पड़े, तो रेल यात्रियों के सुरक्षित सफर की गारंटी कौन लेगा! भोपाल मंडल में सुरक्षा से जुड़े 1,145 पद खाली;
बढ़ते कार्यभार के बीच यात्रियों की सुरक्षा पर उठे सवाल
Tropic Reporters, अंज ठाकुर, भोपाल, 25 जुलाई 2026:
लाखों यात्री प्रतिदिन रेलवे पर भरोसा कर अपने गंतव्य के लिए सफर करते हैं। घर से निकलने के बाद जब तक यात्री सुरक्षित अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचते, तब तक उनके परिजन उनकी चिंता में रहते हैं। इन यात्रियों को सुरक्षित और समय पर मंजिल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी स्टेशन मास्टर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, पाइंट्समैन और सहायक लोको पायलट जैसे सुरक्षा श्रेणी के कर्मचारियों पर होती है। लेकिन भोपाल मंडल में इन पदों के सैकड़ों पद रिक्त हैं। यदि समय रहते इन रिक्तियों को नहीं भरा गया तो मौजूदा कर्मचारियों पर बढ़ता कार्यभार ट्रेनों की समयपालन, स्टेशन प्रबंधन और सुरक्षित संचालन को प्रभावित कर सकता है। लगातार ओवर ड्यूटी और कम स्टाफ के कारण मानवीय भूल का जोखिम बढ़ सकता है, जिसका असर अतंतः यात्रियों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
रिक्त पद और उनका महत्व:
- स्टेशन मास्टर (90 पद): स्टेशन पर ट्रेनों का सुरक्षित संचालन, सिग्नलिंग, प्लेटफार्म प्रबंधन और ट्रेन मूवमेंट की निगरानी करते हैं।
- पाइंट्समैन (170 पद): ट्रैक बदलना, सिग्नलिंग में सहायता और ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करते हैं।
- गार्ड/ट्रेन मैनेजर (225 पद): ट्रेन के सुरक्षित संचालन, समयपालन, ब्रेक पावर की निगरानी तथा ट्रेन रवाना करने और गंतव्य तक संचालन की जिम्मेदारी निभाते हैं।
- लोको पायलट (295 पद): ट्रेन चलाने, गति नियंत्रित करने, सिग्नल का पालन करने और यात्रियों व माल की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का कार्य करते हैं।
- सहायक लोको पायलट (355 पद): लोको पायलट की सहायता करते हैं, सिग्नलों पर नजर रखते हैं, इंजन की तकनीकी निगरानी करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर ट्रेन संचालन में सहयोग देते हैं।
- मेल/एक्सप्रेस लोको पायलट (10 पद): मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का निर्धारित समय पर सुरक्षित संचालन करते हैं तथा उच्च गति में सिग्नल और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करते हैं।
यात्रियों पर पड़ता है असर:
स्टाफ की कमी से ट्रेनों की समयपालन प्रभावित हो सकती है। परिचालन में देरी, प्लेटफार्म व स्टेशन प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है। अचानक कर्मचारी अनुपलब्ध होने पर ट्रेन संचालन और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है।
भविष्य की चुनौती:
यात्री और मालगाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। निशातपुरा जैसे नए स्टेशनों के संचालन और नई ट्रेनों के विस्तार के साथ स्टेशन मास्टर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर व अन्य रनिंग स्टाफ की आवश्यकता भी बढ़ेगी। पर्याप्त मानव संसाधन नहीं होने पर परिचालन और सुरक्षा, दोनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
"वर्ष 2020 से 2024 के बीच रेलवे में इन संवेदनशील (सेफ्टी कैटेगरी) पदों पर भर्ती नहीं होने से मौजूदा कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ा है। 2025 में सहायक लोको पायलट (एएलपी) के 175 पदों पर भर्ती हुई, लेकिन स्टेशन मास्टर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर और पाइंट्समैन जैसे सुरक्षा से जुड़े पदों पर रिक्तियां अब भी चुनौती बनी हुई हैं। लगातार लंबी ड्यूटी और पर्याप्त आराम न मिलने से शारीरिक व मानसिक थकान बढ़ती है, जिसका असर सतर्कता और सुरक्षित रेल संचालन पर पड़ सकता है। इसलिए समय पर भर्ती और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराना परिचालन सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।"
-आरके शर्मा, यूनियन मंडल अध्यक्ष, डब्ल्यूसीआर
"ऐसी कोई बात नहीं है, भोपाल मंडल में स्टेशन मास्टर, पाइंट्समैन, ट्रेन मैनेजर, लोको पायलट और सहायक लोको पायलट के रिक्त पदों पर चरणबद्ध भर्ती की जा रही है। हाल ही में 178 नए एएलपी ने जाइन किया है और 191 अन्य का चयन हो चुका है।"
-अभिराम खरे, अपर मंडल, रेल प्रबंधक, रेलवे