मप्र: देश का प्रथम टेलीकॉम हब

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मध्य प्रदेश में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम हब, 2000 करोड़ रुपये का निवेश, 5G-6G उपकरण बनेंगे, 9 हजार तक रोजगार के अवसर बनेंगे;

Tropic Reporters, Digital desk, नई दिल्ली/भोपाल, 31 जुलाई 2026:



ध्य प्रदेश अब टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। दिल्ली में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्रीय दूरसंचार विभाग (DoT) के बीच हुए एमओयू के बाद ग्वालियर में देश का पहला इंटीग्रेटेड टेलीकॉम टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। यह परियोजना प्रदेश को टेलीकॉम उपकरण निर्माण के साथ-साथ डिजाइन, रिसर्च और एक्सपोर्ट का भी प्रमुख केंद्र बनाएगी।

170 एकड़ पर होगा हाईटेक टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन

ग्वालियर में करीब 170 एकड़ भूमि पर यह अत्याधुनिक टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन विकसित किया जाएगा। परियोजना में शुरुआती चरण में करीब ₹2000 करोड़ का निवेश होगा। इससे पहले चरण में 4500 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे, जबकि भविष्य में 8 से 9 हजार युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

डिजाइन से एक्सपोर्ट तक सब कुछ एक ही परिसर में

यह देश का पहला ऐसा टेलीकॉम हब होगा, जहां किसी उत्पाद की पूरी वैल्यू चेन एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। यहां प्रोडक्ट डिजाइन, रिसर्च एवं डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और एक्सपोर्ट तक की सभी सुविधाएं होंगी। इससे कंपनियों को अलग-अलग शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगे।

5G, 6G, IoT और सेमीकंडक्टर पर रहेगा फोकस

इस जोन में 5G और भविष्य की 6G तकनीक से जुड़े उपकरण, ऑप्टिकल फाइबर, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइस, नेटवर्किंग हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर से जुड़े उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इन तकनीकों का उपयोग रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में होगा।

प्लग एंड प्ले मॉडल से कंपनियों को मिलेगा फायदा

यह परियोजना प्लग एंड प्ले मॉडल पर विकसित की जाएगी। यानी कंपनियों को बिजली, सड़क, पानी और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध रहेंगी। इससे उद्योग कम समय में अपनी यूनिट शुरू कर सकेंगे और उत्पादन तेजी से शुरू होगा।

केंद्र देगा 500 करोड़ रुपये, निवेशकों को विशेष रियायतें

परियोजना को गति देने के लिए केंद्र सरकार करीब ₹500 करोड़ की सहायता देगी, जबकि मध्य प्रदेश सरकार 170 एकड़ जमीन उपलब्ध कराएगी। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए स्टाम्प ड्यूटी का 100 प्रतिशत रिइम्बर्समेंट, पावर टैरिफ सपोर्ट और रियायती दरों पर बिजली जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी।

सीएम डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री ने जताया भरोसा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अब तक इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग में दक्षिण भारत के राज्यों का दबदबा रहा है, लेकिन अब मध्य प्रदेश भी इस क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाएगा। वहीं केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस परियोजना से जुड़ी हर प्रशासनिक और नीतिगत बाधा को दूर करेंगी, ताकि निवेशकों को बेहतर माहौल मिल सके।

दिल्ली-आगरा कनेक्टिविटी बनेगी सबसे बड़ी ताकत

ग्वालियर का चयन उसकी मजबूत सड़क और रेल कनेक्टिविटी को देखते हुए किया गया है। दिल्ली और आगरा से बेहतर संपर्क होने के कारण यहां उद्योगों के विस्तार और लॉजिस्टिक्स को बड़ा लाभ मिलेगा। यह परियोजना मध्य प्रदेश को केवल टेलीकॉम उपकरण निर्माण का केंद्र ही नहीं, बल्कि डिजाइन, रिसर्च, टेस्टिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे प्रदेश में टेक्नोलॉजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और तकनीकी कौशल वाले युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे।

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