डाकघर में वित्तीय समावेशन, मप्र में छह माह के आंकड़ों ने खोली पोल:
By Tropic Reporters — Tuesday, July 21, 2026
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हर डाकघर से मात्र छह नई बीमा पालिसी, मध्य प्रदेश में छह माह के आंकड़ों ने खोली जमीनी हकीकत की पोल;
गांव-गांव वित्तीय समावेशन का दावा, 10 हजार लोगों की जिम्मेदारी, फिर भी औसत प्रदर्शन बेहद कम
Tropic Reporters, अंज ठाकुर, भोपाल, 21 जुलाई 2026:
गांव-गांव वित्तीय सेवाएं पहुंचाने की जिम्मेदारी जिस डाक नेटवर्क के हजारों कर्मचारियों और ग्रामीण डाक सेवकों के कंधों पर है, उसके प्रदर्शन पर अब सवाल उठ रहे हैं। मध्य प्रदेश में 9,257 शाखा डाकघरों और 16,879 कर्मचारियों एवं ग्रामीण डाक सेवकों के बावजूद अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच केवल 59,431 नई पीएलआई और आरपीएलआई बीमा पालिसियां जारी हुईं।
यानी एक शाखा डाकघर ने छह महीने में औसतन सिर्फ 6.4 और एक कर्मचारी ने महज 3.5 नई पालिसियां जोड़ीं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सरकारी वित्तीय योजनाएं वास्तव में गांवों तक पहुंच रही हैं या फिर पूरा तंत्र अपनी क्षमता के अनुरूप काम नहीं कर पा रहा है?
6-7 बीमा पालिसियां ही जारी
मध्य प्रदेश में एक शाखा डाकघर औंसतन लगभग 10 हजार लोगों की सेवा करता है। इसके बावजूद यदि छह महीने में वहां से केवल छह-सात नई बीमा पालिसियां ही जारी हुईं, तो योजनाओं की जमीनी पहुंच पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
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| भारतीय डाक जीवन बीमा विभाग |
आरपीएलआई का उद्देश्य क्या है?
इंडिया पोस्ट के अनुसार ग्रामीण डाक जीवन बीमा (आरपीएलआई) का उद्देश्य ग्रामीण जनता, विशेषकर कमजोर वर्गों और महिलाओं तक बीमा सुरक्षा पहुंचाना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा जागरूकता फैलाना है। यह योजना विशेष रूप से डाकघरों के विशाल ग्रामीण नेटवर्क के कारण शुरू की गई थी।
सवाल क्यों उठ रहे हैं?
यदि उपलब्ध आंकड़ों को आधार बनाया जाए, तो मध्य प्रदेश में इतने बड़े नेटवर्क के बावजूद औसत प्रदर्शन अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है। इससे कई नीतिगत प्रश्न सामने आते हैं
-क्या गांवों में योजनाओं का प्रचार-प्रसार पर्याप्त है?
-क्या प्रत्येक डाकघर नियमित रूप से घर-घर संपर्क अभियान चला रहा है?
-क्या कर्मचारियों को दिए गए लक्ष्य और उनकी निगरानी पर्याप्त प्रभावी है?
-क्या ग्रामीण परिवारों तक बीमा और बचत योजनाओं की जानकारी पर्याप्त रूप से पहुंच रही है?
संचार मंत्री का गृह राज्य फिर भी प्रदर्शन पर प्रश्नचिन्ह
मध्य प्रदेश से आने वाले केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्रामीण क्षेत्रों तक बीमा, बचत और आईपीपीबी सेवाओं के विस्तार पर जोर देते रहे हैं। ऐसे में प्रदेश में बीमा पालिसियों के कम आंकड़े कई सवाल खड़े करते हैं। ऐसे में यह अपेक्षा भी स्वाभाविक है कि मध्य प्रदेश का प्रदर्शन देश के अग्रणी राज्यों में दिखाई दे।
क्या कहते हैं आंकड़े?
तथ्य - आंकड़ा
शाखा डाकघर - 9,257
कर्मचारी/ग्रामीण डाक सेवक - 16,879
(अप्रैल-नवंबर 2025)
नई पीएलआई/आरपीएलआई - 59,431
प्रति डाकघर औसत - 6.4 पॉलिसी
प्रति कर्मचारी औसत - 3.5 पॉलिसी
प्रति डाकघर अनुमानित
सेवा आबादी - 9,700 नागरिक लगभग
डाक विभाग पर सवाल
भारत सरकार के वित्तीय समावेशन का प्रमुख माध्यम डाक नेटवर्क है। ऐसे में यदि प्रति डाकघर छह माह में औसतन केवल छह-सात नई बीमा पालिसियां ही जारी हो रही हैं, तो योजनाओं की पहुंच और कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है।
"डाक विभाग में कर्मचारियों को बचत खातों के लिए लक्ष्य (टारगेट) दिए जाते हैं। सामान्य बचत (एसबी) खाता एक व्यक्ति के नाम पर एक ही खोला जा सकता है, जबकि लागू नियमों के अनुसार आवर्ती जमा (आरडी) के एक से अधिक खाते खोले जा सकते हैं। इसलिए लक्ष्य पूरा करने के लिए एक ही ग्राहक के कई आरडी खाते खोले जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।"
--ज्योति पाण्डे, असिस्टेंट डायरेक्टर, पोस्ट आफिस, भोपाल
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