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संवेदनाओं की भीगी दुनिया में ले जाती है नीलम सक्सेना चंद्रा की नई काव्य-कृति 'सीली शामें'

Tropic Reporters, Digital desk, भोपाल, 21 जुलाई 2026:

सीली शामें: लेखिका - नीलम सक्सेना चंद्रा

हिंदी साहित्य की प्रतिष्ठित कवयित्री, कथाकार और द्विभाषी लेखिका नीलम सक्सेना चंद्रा का नवीन काव्य-संग्रह "सीली शामें" पाठकों को जीवन के उन सूक्ष्म, आत्मीय और अनकहे भावों से रूबरू कराता है, जिन्हें अक्सर शब्दों में बाँधना कठिन होता है। यह संग्रह केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि स्मृतियों, आत्ममंथन, प्रेम, विरह, प्रकृति और जीवन की धीमी पड़ती साँझों का संवेदनशील दस्तावेज है।

नीलम सक्सेना चंद्रा: साहित्यकार

"सीली शामें" उन पलों की कहानी कहती है, जब दिन का उजाला धीरे-धीरे मन की परतों में उतर जाता है और हवा में घुली नमी बीते समय की दस्तक बन जाती है। संग्रह की कविताएँ पाठक को ठहरकर अपने भीतर झाँकने के लिए प्रेरित करती हैं। इनमें कभी अनाम उदासी है, कभी अधूरी मुस्कान, कभी स्मृतियों का स्पर्श और कभी भविष्य की हल्की-सी उम्मीद।

इस संग्रह की एक विशेषता इसका आत्मकथात्मक स्पर्श भी है। पुस्तक की भूमिका में लेखिका ने उल्लेख किया है कि इन कविताओं का जन्म उस समय हुआ जब वे कोलकाता पहुँचीं। नए शहर, नई परिस्थितियों और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच उपजी संवेदनाएँ इन कविताओं में प्रारंभिक उदासी का स्वर लेकर आती हैं। किंतु समय के साथ कोलकाता की संस्कृति, उसकी वर्षा, गलियों और आत्मीयता ने लेखिका के मन में नई ऊर्जा का संचार किया, जिसका प्रभाव संग्रह की बाद की कविताओं में स्पष्ट दिखाई देता है। इस प्रकार "सीली शामें" निराशा से आशा और अकेलेपन से आत्मस्वीकृति की यात्रा का भी काव्यात्मक दस्तावेज़ बन जाती है।

यह पुस्तक लेखिका ने अपनी दिवंगत माता श्रीमती शशि सक्सेना की स्मृति को समर्पित की है, जिनसे उन्होंने जीवन की दृढ़ता और जीने की कला सीखी। यही भावनात्मक आधार पूरे संग्रह को एक आत्मीय ऊष्मा प्रदान करता है।

नीलम सक्सेना चंद्रा समकालीन हिंदी और अंग्रेज़ी साहित्य की अत्यंत चर्चित एवं बहुप्रतिष्ठित लेखिका हैं। सात उपन्यास, नौ कहानी संग्रह, इक्यावन कविता संग्रह, एक यंग एडल्ट फिक्शन तथा सोलह बाल साहित्य की पुस्तकों सहित उनका साहित्यिक अवदान अत्यंत समृद्ध है। उन्हें फोर्ब्स इंडिया द्वारा वर्ष 2014 में देश के 78 सर्वाधिक लोकप्रिय लेखकों में स्थान दिया गया। वे लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हैं तथा सोहनलाल द्विवेदी पुरस्कार, प्रेमचंद पुरस्कार, रवीन्द्रनाथ टैगोर इंटरनेशनल पोएट्री अवॉर्ड, फ्रीडम अवॉर्ड (रेडियो सिटी), सेतु इंटरनेशनल अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस (2024) तथा रियूल इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत हो चुकी हैं। उनकी रचनाएँ दूरदर्शन, साहित्य अकादमी, सार्क तथा देश-विदेश के अनेक साहित्यिक मंचों पर सराही गई हैं और उनकी काव्य प्रस्तुतियों को ऑनलाइन 80 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है।

"सीली शामें" अपने सहज, संप्रेषणीय और भावपूर्ण शिल्प के कारण समकालीन हिंदी कविता में एक महत्वपूर्ण कृति के रूप में देखी जा रही है। यह संग्रह उन पाठकों के लिए विशेष रूप से आकर्षक है जो कविता में जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों, स्मृतियों की नमी, प्रकृति की आत्मीयता और मानवीय रिश्तों की गहराई को महसूस करना चाहते हैं।

यह पुस्तक केवल पढ़ी नहीं जाती, बल्कि महसूस की जाती है, मानो हर कविता साँझ की उस भीगी हवा का स्पर्श हो, जो चुपचाप मन में उतरकर बहुत देर तक साथ बनी रहती है।

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