मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बुजुर्गों की सेवा से दिया सामाजिक संवेदना का संदेश:

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खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बुजुर्गों की सेवा से दिया सामाजिक संवेदना का संदेश, माताजी की पुण्यतिथि पर किया सेवा संकल्प, वृद्धाश्रम में बिताए आत्मीय पल;

Tropic Reporters, Digital desk, भोपाल, 18 जुलाई 2026:

खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने वृद्धाश्रम में बिताए आत्मीय पल

सेवा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अपनी पूज्य माताजी स्वर्गीय श्रीमती ज्ञान बाई की पुण्यतिथि पर वृद्धाश्रम पहुंचकर बुजुर्गों के साथ समय बिताया। उन्होंने न केवल बुजुर्गों के साथ भोजन किया, बल्कि उन्हें वस्त्र भेंट कर उनका हालचाल जाना और सम्मानपूर्वक उनके साथ आत्मीय संवाद भी किया।

यह आयोजन केवल मंत्री श्री राजपूत की मां के प्रति श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और सामाजिक सहभागिता का सशक्त संदेश बनकर सामने आया। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि, बुजुर्गों की सेवा ही सबसे बड़ा संस्कार है और उनका आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।

श्री राजपूत ने वृद्धाश्रम के प्रत्येक कक्ष में जाकर वरिष्ठजनों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की, उनकी आवश्यकताओं की जानकारी ली और आश्रम की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने सभी बुजुर्गों को स्नेहपूर्वक वस्त्र भेंट किए तथा उनके स्वस्थ, सम्मानजनक और सुखद जीवन की कामना की।

कार्यक्रम में उनकी धर्मपत्नी एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, सागर श्रीमती सविता सिंह राजपूत, युवा नेता आकाश सिंह राजपूत तथा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती नंदिका सिंह राजपूत भी उपस्थित रहीं।

इस अवसर का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया जब श्रीमती नंदिका सिंह राजपूत ने अपना जन्मदिन किसी भव्य आयोजन के बजाय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के बीच मनाया। उन्होंने अपने हाथों से भोजन परोसकर बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया। इस पहल ने यह संदेश दिया कि जीवन के विशेष अवसरों को समाज के जरूरतमंद और उपेक्षित वर्ग के साथ साझा करना ही वास्तविक उत्सव है।

बुजुर्गों की सेवा से दिया सामाजिक संवेदना का संदेश






खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि आज की व्यस्त जीवनशैली में बुजुर्गों को केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि अपनापन, सम्मान और समय की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वृद्धाश्रम में रह रहे प्रत्येक बुजुर्ग में हमें अपने माता-पिता का स्वरूप देखना चाहिए और उनके चेहरे पर मुस्कान लाना ही सच्ची मानव सेवा है। उन्होंने अपनी माताजी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनसे मिले सेवा, संस्कार और मानवता के मूल्य ही उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। यदि किसी जरूरतमंद या बुजुर्ग के जीवन में थोड़ी-सी खुशी लाई जा सके, तो वही उनके प्रति सच्ची सेवा होगी।

हर व्यक्ति बुजुर्गों के साथ समय अवश्य बिताएं:

श्री राजपूत ने समाज से आह्वान किया कि जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ अथवा अन्य शुभ अवसरों पर वृद्धाश्रम पहुंचकर बुजुर्गों के साथ समय बिताएं। इससे उन्हें परिवार का अपनापन महसूस होगा और समाज में संवेदनशीलता एवं सामाजिक समरसता का वातावरण मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि, बुजुर्ग बोझ नहीं, हमारे संस्कारों की पहचान हैं। उनकी सेवा केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा है। जिस घर में बुजुर्ग मुस्कुराते हैं, वहां सुख, शांति और समृद्धि स्वयं निवास करती है।

खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत द्वारा की गई यह पहल सामाजिक सरोकार, पारिवारिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने वाली एक प्रेरणादायी गतिविधि आधारित शिक्षण के रूप में लोगों के लिए अनुकरणीय संदेश छोड़ गई।

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