45 साल: सांची की नई पैकेजिंग
45 साल के भरोसे को नया रूप, सांची की बदली पैकेजिंग, सभी डेयरी उत्पाद नए डिजाइन में, आज से बाजार में मिलेंगे नए पैक;
किसानों को हर 10 दिन में भुगतान, गांव में ही होगी दूध की गुणवत्ता जांच
Tropic Reporters, अंज ठाकुर, भोपाल, 07 अगस्त 2026:
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| 45 साल बाद साँची दुग्ध उत्पाद नई पैकेजिंग में उपलब्ध (एमपीसीडीएफ) साँची के उत्पाद पोर्टफोलियो की पैकेजिंग और ब्रांड पहचान में बदला |
यह नई ब्रांड पहचान मध्यप्रदेश शासन और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के बीच हुए अनुबंध के तहत तैयार की गई है। भोपाल में शुक्रवार को इसके लॉन्च के दौरान एनडीडीबी और एमपीसीडीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में वितरक और खुदरा विक्रेता मौजूद रहे।
दूध से दही-पनीर तक बदला पैकेज
नई पैकेजिंग सिर्फ दूध तक सीमित नहीं है। स्मार्ट, गोल्ड, ताजा और शक्ति दूध के साथ सादा दही, पनीर, मठ्ठा, छाछ और चाय दूध यानी चाह की पैकेजिंग भी बदली गई है। करीब पांच साल बाद सांची की पैकेजिंग में बड़ा बदलाव किया गया है। कंपनी का फोकस अब उत्पादों को नए रूप में पेश करने के साथ बाजार में उनकी पहुंच बढ़ाने पर भी है।
42 तरह की जांच के बाद बाजार में पहुंचता है दूध
सांची दूध मध्यप्रदेश के गांवों की सहकारी दुग्ध समितियों से लिया जाता है। इसके बाद भोपाल दुग्ध संघ के आधुनिक संयंत्र में दूध का पाश्चुरीकरण और पैकेजिंग की जाती है। उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले दूध की 42 तरह की गुणवत्ता जांच की जाती है। सांची के प्रत्येक दूध पैक में विटामिन ए और विटामिन डी भी मिलाए जाते हैं।
अब किसानों को महीने में तीन बार भुगतान
सांची से जुड़े किसानों के लिए भी भुगतान व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब किसानों को महीने में तीन बार 5, 15 और 25 तारीख को भुगतान किया जा रहा है। यानी करीब हर 10 दिन में किसानों को उनके दूध का पैसा मिल रहा है। वहीं, जहां बाजार के मुकाबले दूध के रेट कम थे, वहां रेट बढ़ाए गए हैं। एनडीडीबी के सुधारों के बाद किसानों को दूध के रेट में 3 से 9 रुपये तक की बढ़ोतरी का लाभ मिला है।
गांव में ही होगी दूध की गुणवत्ता जांच
दूध कलेक्शन सेंटरों पर गुणवत्ता जांच की व्यवस्था भी मजबूत की जा रही है। गांवों में नए टेस्टिंग उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इससे दूध की गुणवत्ता के आधार पर किसानों को उचित भुगतान किया जा सकेगा। मिलावट की पहचान के लिए भी नई मशीनें लगाई जा रही हैं। इससे दूध की गुणवत्ता और किसानों के भुगतान में पारदर्शिता बढ़ेगी।
सांची से जुड़े 2.40 लाख किसान
मध्यप्रदेश के छह दूध संघों के साथ करीब 2 लाख 40 हजार किसान जुड़े हैं। इन किसानों से दूध का कलेक्शन किया जा रहा है। दूध संग्रह और प्रॉफिट के मामले में भोपाल सबसे आगे है, जबकि इंदौर दूसरे स्थान पर है। हालांकि सभी दूध संघों के विकास पर समान रूप से काम किया जा रहा है।
अब दूसरे शहरों में भी मिलेगी सांची आइसक्रीम
सांची अब नए उत्पादों पर भी ध्यान दे रहा है। पहले सांची आइसक्रीम मुख्य रूप से इंदौर में ही उपलब्ध थी, लेकिन अब इसे भोपाल, उज्जैन समेत दूसरे क्षेत्रों में भी उपलब्ध कराया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य अधिक दूध का कलेक्शन करने के साथ नए उत्पादों के जरिए बाजार में बिक्री बढ़ाना है।

