श्रावण मास में दो दिवसीय कीर्तन सेवा का शुभारंभ:
श्रावण मास में भक्तिरस की अविरल धारा, दो दिवसीय कीर्तन सेवा का शुभारंभ, तिलक जयंती पर छत्रपति शिवाजी महाराज और लोकमान्य तिलक के आदर्शों का हुआ प्रेरक स्मरण;
Tropic Reporters, संदीप सिंह, भोपाल, 02 अगस्त 2026:
श्रावण मास के पावन अवसर एवं लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जयंती के उपलक्ष्य में महाराष्ट्र चैरिटेबल ट्रस्ट एवं श्री साईं बाबा ब्लेसिंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार से दानिश कुंज, कोलार रोड स्थित श्री साईं बाबा ब्लेसिंग फाउंडेशन परिसर में दो दिवसीय भक्तिमय कीर्तन सेवा का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में भक्ति, संस्कृति और राष्ट्रचेतना का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम में हरिभक्त परायण श्रीमती श्रुति भांडारे ने अपने ओजस्वी एवं मधुर कीर्तन से श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। तबले पर सुभाष पांचेखेडे तथा हारमोनियम पर श्रीकृष्ण अठले ने सुमधुर संगत प्रस्तुत कर वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।
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| श्रावण मास में भक्तिरस की अविरल धारा, कीर्तन सेवा का शुभारंभ |
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| दो दिवसीय कीर्तन सेवा में भाग लेते श्रद्धालु |
इस अवसर पर महाराष्ट्र चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष एवं ब्रह्म महाराष्ट्र मंडल, नई दिल्ली की महिला राष्ट्रीय कार्यवाहक श्रीमती पूनम कुलकर्णी ने कहा कि श्रावण मास भगवान शिव की आराधना, अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का सर्वोत्तम काल माना जाता है। इस मास में श्रद्धा और भक्ति से की गई उपासना व्यक्ति के मन, वचन और कर्म को पवित्र बनाती है तथा सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि कीर्तन केवल ईश्वर भक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, समाज जागरण और संस्कार निर्माण का प्रभावी साधन भी है। परिवारों में प्रेम, एकता और नैतिक मूल्यों का विकास ही सशक्त समाज और राष्ट्र की आधारशिला है। भगवान गणेश का संदेश समाज में आनंद, अनुशासन और संगठन की भावना को सुदृढ़ करने का है।
कीर्तन के पूर्वार्ध में छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्य, राष्ट्रप्रेम, आत्मसम्मान और लोककल्याणकारी शासन के आदर्शों का प्रेरक वर्णन किया गया। वहीं उत्तरार्ध में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा सार्वजनिक गणेशोत्सव के माध्यम से समाज को संगठित कर राष्ट्रीय चेतना जागृत करने के ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला गया। साथ ही मराठी पत्रकारिता, भारतीय शिक्षा, कुटुंब व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में उनके अविस्मरणीय योगदान का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं को भारतीय इतिहास और संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के संबंध में आनंद रेगे ने बताया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कीर्तन का रसास्वादन किया तथा धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत प्रेरणादायी संदेश ग्रहण किया। दो दिवसीय आयोजन के प्रथम दिन श्रद्धा और भक्ति का अनुपम वातावरण बना रहा।

