भोपाल: SC का फरमान, अब नहीं होंगे ऊपर मकान नीचे दुकान
By Tropic Reporters — Monday, August 10, 2026
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भोपाल के रिहायशी इलाकों में कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, 1 लाख प्रॉपर्टी का सर्वे, बड़ा सवाल-आगे क्या होगा? 10 नंबर मार्केट-अरेरा कॉलोनी में ट्रैफिक और पार्किंग से परेशान रहवासी;
व्यापारी बोले- अचानक कार्रवाई से लाखों लोग प्रभावित होंगे; 15 सितंबर तक निगम को देनी है रिपोर्ट
Tropic Reporters, Digital desk, भोपाल, 10 अगस्त 2026:
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| आवासीय सम्पति में कारोबारी गतिविधियों पर SC का मप्र सरकार को सख्त निर्देश |
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| भोपाल में आवासीय स्थल पर व्यवसायिक गतिविधियां आम प्रचलन |
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| आवासीय परिसरों में व्यवसायिक गतिविधियों के विरुद्ध रहवासियों का प्रदर्शन |
भोपाल के अरेरा कॉलोनी और आसपास के इलाकों में वर्षों से बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों के कारण रहवासियों को ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और भीड़ की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। रहवासियों का आरोप है कि जिन इलाकों को परिवारों के रहने के लिए विकसित किया गया था, वहां धीरे-धीरे दुकानें, रेस्टोरेंट, कार्यालय और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुल गए।
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का आरोप है कि कई जगह आवासीय प्लॉट पर मकान के नक्शे स्वीकृत हुए, लेकिन बाद में वहां बड़े व्यावसायिक निर्माण और गतिविधियां शुरू हो गईं। उनका कहना है कि कार्रवाई नहीं होने से समस्या लगातार बढ़ती गई।
अरेरा कॉलोनी निवासी लवनीश भाटी के मुताबिक, पहले दुकानें मुख्य सड़क तक सीमित थीं, लेकिन अब कॉलोनी के अंदर तक व्यावसायिक गतिविधियां पहुंच गई हैं। वाहनों की पार्किंग से कई बार घरों के गेट तक खोलना मुश्किल हो जाता है। रात तक भीड़ और शोर रहने की शिकायत भी रहवासियों ने की है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख
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| आवासीय परिसरों में चल रहे व्यवसायों पर कार्रवाई करता भोपाल नगर निगम |
5 अगस्त की सुनवाई के बाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख सख्त रहा। कोर्ट ने रिहायशी परिसरों में नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से मिले अंतरिम राहत/स्टे आदेशों को भी निरस्त कर दिया गया।
कोर्ट का मूल रूप से जोर इस पर है कि भूमि और भवन का उपयोग स्वीकृत मास्टर प्लान, विकास नियमों और कानून के अनुसार होना चाहिए। किसी अन्य समिति या प्रक्रिया के नाम पर अदालत के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई को रोका नहीं जा सकता।
अब निगम की कार्रवाई की प्रतीक्षा
नगर निगम को सबसे पहले सर्वे के जरिए यह पता लगाना होगा कि कौन-सी संपत्ति वास्तव में आवासीय स्वीकृत है और वहां किस तरह की व्यावसायिक गतिविधि चल रही है। इसके बाद नियमों के उल्लंघन की स्थिति, स्वीकृत नक्शे और भूमि उपयोग की जांच होगी।
जहां नियमों का स्पष्ट उल्लंघन मिलेगा, वहां नोटिस, उपयोग बंद कराने, सीलिंग या अन्य वैधानिक कार्रवाई हो सकती है। हालांकि हर घर में चल रही गतिविधि को एक ही श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा। कानूनी उपयोग, मिश्रित भूमि उपयोग और पूरी तरह अवैध व्यावसायिक उपयोग के बीच अंतर करना जरूरी होगा।
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| नगर निगम की कार्रवाई के विरुद्ध प्रदर्शन करते व्यवसायी संगठन |
व्यापारियों की मांग- मिक्स लैंड यूज का रास्ता निकले
भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स का कहना है कि शहर में वर्षों से विकसित हो चुकी व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए सरकार को मास्टर प्लान या मिक्स्ड लैंड यूज के जरिए व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए। व्यापारियों का दावा है कि अचानक बड़े पैमाने पर सीलिंग से रोजगार और कारोबार प्रभावित होगा।
अब असली चुनौती यही है कि रहवासियों के शांतिपूर्ण और सुरक्षित जीवन के अधिकार और वर्षों से चल रहे कारोबार—दोनों के बीच कानूनी संतुलन कैसे बनाया जाए। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद निगम का सर्वे इस विवाद में अगला निर्णायक कदम माना जा रहा है।
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