‘हिंदी; संकोच से सम्मान तक’:

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"कभी संकोच की भाषा रही हिंदी, आज सम्मान और आत्मविश्वास की पहचान बन रही है": श्रीकृष्ण 'जुगनू', ‘हिंदी; संकोच से सम्मान तक’ विषय पर आयोजित हिन्दी सप्ताह;

09 सितंबर 2026, Tropic Reporters, Digital desk, उदयपुर:

‘हिंदी; संकोच से सम्मान तक’ विषय पर बोलते वरिष्ठ साहित्यकार श्रीकृष्ण 'जुगनू'
विद्या भवन रूरल इंस्टीट्यूट एवं राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हिंदी सप्ताह के अंतर्गत वरिष्ठ साहित्यकार श्रीकृष्ण जुगनू ने ‘हिंदी : संकोच से सम्मान तक’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिंदी ने लंबे संघर्ष और अनेक चुनौतियों के बीच अपनी पहचान बनाई है। कभी हिंदी बोलने में संकोच महसूस किया जाता था, लेकिन आज यही भाषा सम्मान, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बन रही है

श्री जुगनू ने हिंदी के विकास और उसके संघर्ष से जुड़े अनेक ऐतिहासिक एवं साहित्यिक उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि हिंदी का वर्तमान स्वरूप लंबे भाषायी और सांस्कृतिक संघर्ष की देन है। अपने वक्तव्य में उन्होंने नंदिनागरी (नंदी) लिपि का उल्लेख करते हुए भारतीय भाषाओं और लिपियों की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने नंदी लिपि के उद्भव से जुड़े विभिन्न संदर्भों की जानकारी देते हुए भारतीय भाषायी विरासत की विविधता और समृद्धता को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल बोलचाल की भाषा तक सीमित न रखकर ज्ञान, साहित्य, शिक्षा और शोध की भाषा के रूप में निरंतर विकसित करने की आवश्यकता है। उनके वक्तव्य में हिंदी के अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ते हुए भाषा के प्रति गौरव और आत्मविश्वास का संदेश प्रमुख रहा।

राजस्थान साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. वसंत सिंह सोलंकी ने अपने उद्बोधन में कहा कि जो राष्ट्र अपनी भाषा और संस्कृति को छोड़ देता है, वह कभी वास्तविक उन्नति नहीं कर सकता। हमें अपनी भाषा और संस्कृति को अपनाना चाहिए तथा उन पर गर्व महसूस करना चाहिए। 9 सितंबर को भारतेंदु हरिश्चंद्र की जयंती होने के कारण कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. निर्मला शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिंदी भाषा के विकास में भारतेंदु हरिश्चंद्र के योगदान को याद किया और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

महाविद्यालय की निर्देशिका प्रो. कनिका शर्मा ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने दैनिक जीवन में हिंदी भाषा का अधिकाधिक प्रयोग करें और इसका मान बढ़ाएं। स्वागत उद्बोधन विभागाध्यक्ष डॉ. सरस्वती जोशी ने दिया।

कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने हिंदी के प्रति बदलती सामाजिक दृष्टि और उसके व्यापक स्वरूप पर वक्ता के विचारों को रुचिपूर्वक सुना। इस अवसर पर डॉ. मनीष रावल, डॉ. कंचन पानेरी, डॉ. अंजु जैन, डॉ. सबा खान, डॉ. ज्योति कंठालिया, डॉ. नीलू तिवारी, डॉ. हर्षित भटनागर, डॉ. किरण असनानी, डॉ. लक्ष्मण सिंह, मीनाक्षी पारीक एवं राजेश जैन उपस्थित रहे। यह जानकारी कार्यक्रम संयोजिका डॉ. निर्मला शर्मा ने दी।

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