सितंबर में बैंक हड़ताल से बैंकिंग सेवाओं पर पड़ेगा असर:

🎧 सुनें:

सितंबर में कई दिन बंद रहेंगी बैंक शाखाएं, हड़ताल से बैंकिंग सेवाओं पर पड़ेगा असर, 5-दिवसीय कार्य सप्ताह और PLI योजना के विरोध में बैंक यूनियनों का आंदोलन;

कैश, चेक क्लियरेंस समेत शाखा के कई काम हो सकते हैं प्रभावित

09 सितंबर 2026, Tropic Reporters, Digital desk, भोपाल:

प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल: प्रतीकात्मक चित्र
सितंबर में बैंक ग्राहकों को शाखा से जुड़े जरूरी काम निपटाने के लिए पहले से योजना बनानी होगी। बैंक यूनियनों की प्रस्तावित हड़ताल और शनिवार-रविवार के नियमित अवकाश के कारण प्रदेश में कई दिनों तक बैंक शाखाओं का कामकाज प्रभावित रहेगा। हड़ताल में करीब 40 हजार बैंक कर्मचारियों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई और मोबाइल बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहने की उम्मीद है।

प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल: प्रतीकात्मक चित्र
बैंक यूनियनों ने 11 सितंबर को हड़ताल और इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल का आह्वान किया है। वहीं 12 सितंबर दूसरा शनिवार, 13 सितंबर रविवार तथा 26 सितंबर चौथा शनिवार और 27 सितंबर रविवार होने से इन दिनों भी बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। ऐसे में सितंबर में हड़ताल और नियमित अवकाश के कारण कई दिनों तक बैंक शाखाओं का कामकाज प्रभावित रहेगा।

कई सेवाओं पर पड़ सकता है असर

हड़ताल के दौरान बैंक शाखाओं में नकद जमा और निकासी, चेक जमा व क्लियरेंस, केवाईसी, लॉकर और अन्य काउंटर सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वे नकद लेन-देन या शाखा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण काम हड़ताल से पहले निपटा लें।

पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग

बैंक यूनियनों की प्रमुख मांग है कि दूसरे और चौथे शनिवार के बजाय हर शनिवार को अवकाश घोषित कर पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू किया जाए। यूनियनों का प्रस्ताव है कि सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना करीब 40 मिनट अतिरिक्त काम कराया जा सकता है।

इसके अलावा स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों की PLI योजना वापस लेने, पेंशन अपडेशन, एक्स-ग्रेशिया की समीक्षा, NPS को OPS में बदलने, समान DA व्यवस्था और पर्याप्त कर्मचारियों की भर्ती जैसी मांगें भी उठाई जा रही हैं।

यूनियनों का आरोप है कि अधिकारियों के लिए लागू PLI योजना से कर्मचारियों के बीच असमानता बढ़ेगी। सरकार और बैंक संगठनों के बीच बातचीत के बाद ही आंदोलन की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

📝 सारांश:
सारांश लोड हो रहा है...
🔗 संबंधित लिंक: